कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं हो सकतीं। ऐसा ही गजब का हौंसला है, 13 साल की उम्र में दुल्हन बनी इस लड़की है, दिलचस्प कहानी।
विज्ञापन
2 of 8
रेसलर नीतू सरकार
ये हैं रोहतक के महम की नीतू सरकार। चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आई नीतू सरकार ने अपनी कहानी सुनाई तो वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई, लेकिन गर्व भी हुआ। नीतू देश की या दुनिया की पहली ऐसी महिला रेसलर हैं, जिनका चयन दो बच्चों की मां होने के बाद जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के लिए हुआ था।
विज्ञापन
3 of 8
पहलवान नीतू सरकार
इस उपलब्धि के लिए सीमा सुरक्षा बल में उन्हें सब इंस्पेक्टर का पद दिया गया है। नीतू सरकार, एक ऐसी रेसलर जिसका बचपन बीता अपने जीवन को बर्बादी से बचाने के दंगल में और जवानी में कदम रखा तो बन गई ‘दंगल क्वीन’। नीतू बचपन से ही सपना है कि पहलवान बनूं और गोल्ड मेडल जीतूंगी। लेकिन 13 साल की उम्र में पिता ने विवाह कर दिया। 45 साल की उम्र के अधेड़ के साथ।
4 of 8
रेसलर नीतू सरकार
नीतू ने बताया कि पिता की भी मजबूरी थी। घर में खाने के लाले थे तो बेटी के हाथ पीले करने का खर्च कहां से लाते। नीतू ससुराल तो गई, लेकिन लौट आई। पिता ने सोचा बेमेल विवाह ही लौटने का कारण है। इसलिए महम के गांव बेड़वा के संजय के साथ दूसरी शादी कर दी। 15 वर्ष की उम्र में दो बच्चों की मां बन गई, बावजूद इसके नीतू ने अपने सपने को मरने नहीं दिया।
विज्ञापन
5 of 8
पहलवान नीतू सरकार
नीतू ने बताया कि पति संजय से वह अपने सपने साझा करती थी। इसके बाद संजय ने प्रोत्साहित किया। उसने 18 साल की उम्र में प्रैक्टिस शुरू कर दी। आज वह 20 साल की है और देश की जानी मानी रेसलर बन चुकी हैं। कई मेडल अपने नाम कर चुकी है। विदेशों में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। नीतू ने अपना सपना साकार करने के लिए बहुत मेहनत की।
विज्ञापन
6 of 8
पहलवान नीतू सरकार
नीतू ने बताया कि वह काली जैकेट पहनकर गर्मियों में 10-10 किलोमीटर दौड़ लगाती थी। ऐसा वह शरीर को मजबूत बनाने ओर सहनशक्ति बढ़ाने के लिए करती थी। पति संजय सुबह चार बजे उसे बाइक पर घर से 40 किलोमीटर दूर रोहतक के छोटूराम स्टेडियम लेकर पहुंचता। वहां वह सात बजे तक अभ्यास करती, फिर वह उसे लेकर लौटता। नीतू एक झटके में 15 किलो वजन तोड़ सकती है।
विज्ञापन
7 of 8
पहलवान नीतू सरकार
यह प्रक्रिया कई सालों तक चलता चलती रही। वह स्थानीय और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताएं जीतती रही। सन 2014 में नेशनल जूनियर चैंपयिनशिप के लिए चुन ली गई, जिसमें उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2015 में केरल में हुए नेशनल गेम्स में कांस्य पदक जीता। वह अगस्त 2015 वह ब्राजील में हुई जूनियर चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है। अब उनका सपना ओलंपिक गेम्स हैं।
नीतू बताती हैं कि गरीबी के कारण वह फटे जूतों और फटी ड्रेस में प्रैक्टिस करने को मजबूर थी। साथी खिलाड़ी ही उनकी मदद करते थे, कोई अपनी पुरानी ड्रेस दे देता था तो कोई थोड़ा-बहुत घी दे देता था। ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में भी कुश्ती करना नहीं छोड़ा। यही कारण है कि नीतू देश की बेहतरीन महिला पहलवानों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही हैं। अब नीतू का चयन साईं एक्सीलेंस सेंटर में हो चुका है।