चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक बच्चे के मन में पता नहीं क्या आया कि उसने टीचर से पूछा कि मैडम जी! हर बार हम पाकिस्तान से ही क्यों लड़ते हैं? तो टीचर ने भी बड़ी मासूमियत से जवाब दिया देखिए...
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आर्मी स्कूल के बच्चों ने जानी जंग की हकीकत
- फोटो : अमर उजाला
मैडम जी! हर बार हम पाकिस्तान से ही क्यों लड़ते हैं। आर्मी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ने वाले रोहन ने जब आर्मी स्टेडियम (पैंथर स्टेडियम) में लगाई गई हथियारों की प्रदर्शनी में कारगिल जीत चुकी तोप को देखकर मैडम (क्लास टीचर) से पूछा। मैडम ने बस यही कहा बच्चे पाकिस्तान शरीफ नहीं है।
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आर्मी स्कूल के बच्चों ने जानी जंग की हकीकत
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आर्मी स्कूल के बच्चे हथियारों के साथ फोटो खिंचवा रहे थे, सेल्फी ले रहे थे। आर्मी ने गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करती प्रदर्शनी बच्चों को आर्मी से जोड़ने के लिए की थी। ब्रिगेडियर कुणाल कश्यप कहते हैं कि आर्मी देश की रक्षा में सबसे आगे हैं, आज के बच्चे कल के देश का भविष्य हैं, यह प्रदर्शनी इस लिए लगाई गई।
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आर्मी स्कूल के बच्चों ने जानी जंग की हकीकत
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तोप के गोले दिखाते आर्मी अफसर कैलाश चंद्र कहते हैं कि जब जंग के मैदान में होते हैं तब हमें एक ही चिंता रहती है, वह है, भारत मां की। हथियार तो लोहे के बने होते हैं, इन्हें दुश्मनों की गोलियों के बीच चलाने के लिए लोहे की तरह दिल का ढालना पड़ता है। जंग हथियारों से ही नहीं जज्बे से लड़ी जाती है।
आर्मी स्कूल के बच्चों ने जानी जंग की हकीकत
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आर्मी स्कूल की सातवीं कक्षा की छात्रा कोमल कहती है कि मैं तो डाक्टर बनूंगी। आर्मी स्कूल का दिव्यांग छात्र निशांत भी डाक्टर बनना चाहता है। चौथी कक्षा की पौर्वी कहती है कि मैं इंजीनियर बनूंगी। कुल मिलाकर आज के बच्चें आर्मी से अधिक डाक्टर व इंजीनियर बनने के ख्वाब देख रहे हैं , यह वह बच्चे हैं, जिनके माता-पिता आर्मी से जुड़े हैं। ऐसे में आर्मी के तरफ बच्चों का रुझान बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई थी।