हाइवे किनारे हुई शराबबंदी करवाकर देश को हिलाकर रख देने वाला ये 'व्हील चेयर' वाला शख्स एक और लड़ाई लड़ने को तैयार है। जानिए अब क्या होगा।
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हरमन सिंह सिद्धू
दरअसल, स्टेट हाईवे की डिनोटिफिकेशन के खिलाफ हरमन सिद्धू की ओर से दायर याचिका स्वीकार कर ली है। सुप्रीमकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जुलाई में सुनवाई करने का कहा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने 16 मार्च को चंडीगढ़ के कुल 12 स्टेट हाईवे के स्टेट्स को डिनोटिफाई कर अधिसूचना जारी की थी।
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हरमन सिद्धू
इसके खिलाफ एनजीओ एराइव सेफ सोसायटी की ओर से पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद एनजीओ एराइव सेफ सोसायटी ने चंडीगढ़ प्रशासन के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
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हरमन सिद्धू
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता में बेंच ने आज सुनवाई करते हुए याचिका स्वीकार की। याचिका पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की गई। जुलाई में याचिका पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट व नेशनल हाईवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाले शराब के ठेकों, डिस्कोथेक, रेस्तरां व क्लब में शराब परोसने पर पाबंदी लगा दी थी।
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हरमन सिद्धू
इस फैसले के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने मध्य मार्ग को छोड़कर शहर के सभी स्टेट हाईवे को मेजर डिस्ट्रिक रोड में तब्दील कर दिया था। ताकि शराब ठेकों, होटलों व रेस्तरां को सुप्रीमकोर्ट के फैसले से दूर रखा जा सके। सिद्धू ने प्रशासन के फैसले के खिलाफ दायर याचिका में कहा है कि शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कई प्रदेश काट निकाल रहे हैं।
सबसे पहले चंडीगढ़ ने शुरुआत की। सभी स्टेट हाईवे को मेजर डिस्ट्रिक रोड में तब्दील कर दिया। उसके देखा-देखी राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, यूपी और तेलगांना ने स्टेट हाईवे को मेजर डिस्ट्रिक रोड में बदल दिया है।