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एक युवक ने ऐसा क्या रख दिया काउंटर पर, सारे बैंक में बजीं तालियां

Thu, 17 Nov 2016 09:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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बदले जा रहे नोट - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद नोट जमा करवाने के लिए लाइन में लगे लोग भी दुखी हैं, बैंक स्टाफ भी। ऐसे में एक युवक ने चंद मिनटों के लिए सही, सबको खुश कर दिया। मामला सामने आया हरियाणा के फतेहाबाद जिले के रतिया कस्बे में। एक तरफ जहां सौ-सौ के नोटों के लिए हाहाकार मचा हुआ है, वहीं मंगलवार को रतिया के अनाज मंडी रोड स्थित ओबीसी बैंक की शाखा में एक युवक ने सौ-सौ के 325 नोट जमा कराए। 
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बदले जा रहे नोट - फोटो : अमर उजाला
बैंक में पैसा जमा कराने के लिए लाइन में खड़े इस युवक ने अपनी बारी आने पर कैशियर के सामने सौ-सौ के नोट रखे तो कैशियर भी अचंभे से अपनी सीट पर खड़ा हो गया। उसने इसकी जानकारी मैनेजर को दी। मैनेजर और स्टाफ ने युवक को सम्मानित किया। नोटबंदी की घोषणा होने के बाद पूरे जिले में पहली बार किसी बैंक में सौ-सौ के नोट जमा हुए हैं। 
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बदले जा रहे नोट - फोटो : अमर उजाला
हिसार की एक फर्म चोपड़ा फर्टिलाइजर के सेल्समैन श्रवण कुमार ओबीसी बैंक की शाखा में पैसे जमा कराने के लिए अपनी लाइन में खड़ा था। पैसे जमा करवाने के लिए उसकी बारी आई तो श्रवण ने सौ-सौ के 325 नोट कैशियर को पकड़ा दिए। कैशियर ने बैंक मैनेजर हकीकत राय को इसकी जानकारी दी।  इसके बाद बैंक के स्टाफ ने तालियों के साथ श्रवण का स्वागत किया।

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बदले जा रहे नोट - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी से विदेशी छात्र भी परेशान, नहीं मिल रहा सामान
नोटबंदी ने न केवल आम आदमी, बल्कि शहर की शिक्षण संस्थाओं में पढ़ रहे विदेशी छात्रों की भी नींद उड़ा रखी है। कामी रोड स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र मंगलवार को सुभाष चौक स्थित विजय बैंक के एटीएम पर पहुंचे, लेकिन पैसे खत्म होने के कारण मायूस लौटना पड़ा। शहर के आधा दर्जन शिक्षण संस्थान में विदेशी छात्र पढ़ते हैं। 
 
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बदले जा रहे नोट
ज्यादातर हॉस्टल में रहते हैं, जहां खाने-पीने की तो व्यवस्था हो रही है, लेकिन रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं खरीदने के लिए बाजार जाना पड़ता है। यहां खरीददारी करने के लिए विदेशी छात्रों के पास पैसे नहीं हैं। दोपहर करीब 12 बजे विजया बैंक के एटीएम पर पहुंचे अफ्रीकी देश कैमरून निवासी राबर्ट ने बताया कि करीब 40 विदेशी छात्र कामी रोड स्थित एक निजी इंजीनियर शिक्षण संस्थान में पढ़ते हैं। 
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ज्यादातर हॉस्टल में रहते हैं, जबकि कुछ विदेशी ऋषि कॉलोनी में किराए पर रहते हैं। पैसे की कमी से सामान खरीदने में परेशानी हो रही है। पहले एटीएम से पैसे निकाल कर सामान खरीदते थे, लेकिन अब काफी भीड़ के चलते उनका नंबर ही नहीं आ रहा। आसपास परिचित न होने के कारण उनके लिए काम चलाना मुश्किल हो रहा है।
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