नोटबंदी के बाद कालेधन को सफेद करने के बड़े तरीके का पर्दाफाश हुआ है। अमर उजाला ने बैंक के बाहर स्टिंग ऑपरेशन में इस सच का खुलासा किया।
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नोटबंदी के बाद काले धन को सफेद में बदल रहे लोग
'अमर उजाला' ने खुफिया कैमरे से शहर के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाहर स्टिंग आप्रेशन किया तो इसमें लाइन में लगे कई दिहाड़ी मजदूर फंस गए। खुफिया वीडियो कैमरे पर दिहाड़ी मजदूर इस बात को स्वीकार भी कर रहे हैं कि उन्हें नोट एक्सचेंज करवाने के बदले दिहाड़ी मिल रही है। (अमर उजाला के पास ये वीडियो सुरक्षित है)
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नोटबंदी के बाद काले धन को सफेद में बदल रहे लोग
इस वीडियो में दिहाड़ी मजदूर ये भी कहते हुए दिख रहे हैं कि उसके पास और भी लोग हैं जो नोट एक्सचेंज करवाने के लिए बैंकों की लाइन में लगने को तैयार हैं। इस स्टिंग आप्रेशन में अनाजमंडी के कई दुकानदारों का जिक्र है, इसके अलावा इन दिहाड़ीदार मजदूरों ने मंडी में ही अपने ठिकाने का जिक्र भी वीडियो में किया है।
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नोटबंदी के बाद काले धन को सफेद में बदल रहे लोग
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि एसबीआई और अन्य बैंकों के बाहर खड़े मजदूर 45 सौ रूपए की लिमिट में नोट एक्सचेंज करने के लिए ढाई सौ से तीन सौ रूपए कमीशन ले रहे हैं। इसके अलावा बैंकों में नोट एक्सचेंज पर स्याही लगने के फैसले का भी तोड़ इन लोगों ने ढूंढ निकाला है। पड़ताल में सामने आया है कि बुधवार से स्याही लगाने के बाद ये मजदूर अब अपने परिजनों को भी लाइन में लगाने को तैयार हैं।
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नोटबंदी के बाद काले धन को सफेद में बदल रहे लोग
इससे पहले 10 नवंबर से ही ये लोग एक ही दिन में दो-दो-तीन-तीन बार लाइनों में लगकर नोट एक्सचेंज करवा चुके हैं। अमर उजाला के स्टिंग आप्रेशन में ये बात निकल कर सामने आई है कि एक ही दिन में अगर कई बैंकों के बाहर लाइन लगवाने की जरूरत है तो लाइन में लगने वालों की एक पूरी फौज मौजूद है। बशर्ते पैसे अच्छे मिलने चाहिएं। एक दिहाड़ी मजदूर ने ये बात कबूल की है कि एक साथ दस लोग लाइन में लगवा सकते हैं।
दरअसल नोट एक्सचेंज फार्म लेकर बैंकों के बाहर लाइनों में लगे मजदूरों के नोट इसलिए भी संदेहास्पद हैं, क्योंकि शहर में किसी भी बैंक के बाहर एटीएम या कैश डिपोजिट की लाइन में मजदूर नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि अगर उनके खाते में पैसे हैं तो वो एटीएम से भी पैसे निकलवा सकते हैं लेकिन बैंकों की लाइन में लगे मजदूरों के हाथों में पांच सौ और हजार के नोट एवं एक्सचेंज फार्म हैं जो उन्हें संदिग्ध की श्रेणी में खड़ा कर रहे हैं।