पंजाब में अमृतसर के बाद मोगा में 2000 के नए नोट के नकली नोट सामने आने पर यह सवाल उठना लाजमी है कि असली और नकली नोटों की पहचान कैसे की जाए। हम आपको बता रहे है कुछ सरल उपाय जिससे आप असली व नकली नोट की आसानी से पहचान कर सकेंगे।
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इंडियन करेंसी
वॉटर मार्क: सभी असली नोटों की लेफ्ट साइड पर महात्मा गांधी का हल्का शेडेड वॉटर मार्क होता है । जब आप नोट को तिरछा करेंगे तो इस वाटर मार्क में अलग-अलग दिशाओं में जाने वाली लाइनें दिखाई देंगी। इसके साथ ही अंकों में नोट का मूल्य भी लिखा होता है।
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बैंक में रुपया निकालने और जमा करने के लिए लोगों की भीड़
सिक्योरिटी थ्रेड: सिक्योरिटी थ्रेड असली नोटों को पहचानने का बहुत ही भरोसेमंद तरीका है। यह थ्रेड महात्मा गांधी की फोटो के लेफ्ट साइड में होता है, जिस पर भारत और आरबीआई लिखा होता है। ध्यान रहे कि 5 से 50 रुपये के नोटों के तार पर केवल भारत छपा होता है।
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बैंक में उपभोक्ताओं की लगी भीड़
पहचान चिन्ह: 20 रुपये और इससे ज्यादा मूल्य के नोटों पर फ्लोरल प्रिंट के ठीक नीचे एक पहचान चिन्ह बना होता है। यह खास तरह का निशान होता है जो सभी नोटों में यह अलग आकार का होता है और वाटर मार्क के बाईं ओर दिखाई देता है। 20 रुपये में यह वर्टिकल रेक्टेंगल, 50 रुपए में चकोर, 100 रुपये में ट्राइएंगल होता है।
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बैंक
रजिस्ट्रेशन: वॉटर मार्क के बिल्कुल लेफ्ट साइड में फ्लोरल प्रिंट होता है। नोट में बैक टू बैक दो फूल बने होते हैं। यह सामने से खाली और पीछे से भरा हुआ होता है। इस डिजाइन को रोशनी में रख कर देखा जा सकता है।
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बैंक के बाहर लाइन में खड़े लोग
उभरा हुआ प्रिंट: 20 रुपये और उससे अधिक मूल्य के नोटों पर फ्लोरल प्रिंट, अशोक स्तंभ, पहचान चिन्ह, रिजर्व बैंक की गारंटी, मूल्य अदा करने का वचन, रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर, महात्म गांधी की तस्वीर और रिजर्व बैंक की सील उभरे प्रिंट में बने होते हैं।
ऑप्टिकल वैरिएबल इंक : 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों पर मूल्य रंग बदलने वाली इंक (ऑप्टिकल वैरिएबल इंक) से लिखा होता है। जब हम नोट को सीधा पकड़ते हैं तो हरा और इसे थोड़ा तिरछा करने पर यह हमें नीले रंग का दिखाई देता है।