इससे ज्यादा और दुर्भाग्य की बात क्या होगी कि पंजाब में एक गांव ऐसा है, जहां लोगों की मौत अधिकतर कैंसर से ही होती है। इसे कैंसर पीड़ितों का गांव भी कहा जाता है। देखिए।
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देखिए एक ऐसा गांव, जहां हर तीसरे घर में कैंसर का मरीज
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ये गांव है मोगा जिले में स्थित बाघापुराना सब डिवीजन का गांव माड़ी मुस्तफा। यहां लोगों के मौत की अधिकतर वजह कैंसर ही होती हैं। एक साल में करीब 50 लोग बीमारी के चलते दम तोड़ चुके हैं।
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कैंसर का इलाज महंगा होने के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर हो रहा है लेकिन फिर भी लोग कर्ज या जमीन बेच कर महंगा इलाज करवाने के लिए मजबूर हैं। सेहत विभाग ने नमूने लेने के लिए किटें न होने की बात कह सर्वे बंद कर दिया और मरीजों की जांच और इलाज के लिए हाथ खड़े कर दिए।
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मरीजों की संख्या बढ़ने पर सेहत विभाग की टीम ने तकरीबन 394 संदिग्ध मरीज लोगों के नमूने हासिल किए थे। 23 को काला पीलिया और 9 को काला पीलिया-बी और 8 कैंसर मरीजों की पुष्टि हई थी। गांव में कुल 77 में से 14 मौतें कैंसर और दो मौतें काला पीलिया से होने की पुष्टि की थी।
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पंजाब का सेहत विभाग जांच किट की कमी का रोना रोकर पल्ला झाड़ता रहा। समाजसेवी गुरतेज सिंह ने दावा किया कि गांव में बीते एक वर्ष के दौरान कैंसर से 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं जबकि पिछले तीन महीने में इस बीमारी से पीड़ित 10 लोगों ने दम तोड़ा है।
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समाजसेवी के मुताबिक गांव के हर तीसरे घर में किसी न किसी भयानक बीमारी से पीड़ित मरीज हैं। किसी भी व्यक्ति को मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद नहीं मिली।
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कैंसर और पीलिया मरीजों की बड़ी संख्या के मद्देनजर केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री विजय सांपला ने यहां केंद्रीय टीम भेजने का ऐलान कर चुके हैं। वहीं आम आदमी पार्टी 'आप' के सांसद भगवंत मान ने भी हलके का दौरा कर लोगों की तकलीफ से रूबरू हुए।