फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महाशिवरात्रि: भोले को खुश करना है तो ऐसे करें पूजा, दो राशियों के लोग रहें अलर्ट

Sat, 10 Feb 2018 09:33 AM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 7
lord shiva symbol image
महाशिवरात्रि पर व्रत रखना है और भगवान भोले को खुश करना चाहते हैं तो पूजा करते समय इन नियमों का पालन करें, सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी।
विज्ञापन

2 of 7
lord shiva
जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र सेक्टर-15 के प्रमुख स्वामी राम बहादु़र मिश्र का कहना है कि इस बार शिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी चंद्र है। चंद्रमा मकर राशि में है और ये शनि की राशि है। सूर्य भी शनि की राशि कुंभ में रहेगा। मंगल स्वराशि यानी वृश्चिक राशि में रहेगा। यह योग सभी के लिए अच्छा रहने वाला है। खासतौर पर मकर, कर्क, वालों के लिए भाग्योदय का समय रहेगा। धनु, मिथुन के लिए चिंताएं बढ़ सकती हैं। शेष राशियों के लिए समय सामान्य रहेगा।
विज्ञापन

3 of 7
lord shiva
महाशिवरात्रि पर बेलपत्र के अलावा गंगाजल, गन्ने के रस, पंचामृत और कुशा के जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है। इससे विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शिव जी को धतूरा बहुत पसंद होता है, इसलिए महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करें। इससे शत्रुओं का भय दूर होता है, साथ ही धन लाभ मिलता है। सम्भव हो तो चंदन और रुद्राक्ष भी चढ़ाएं।

4 of 7
lord shiva
शिव जी को रात्रि जागरण अत्यंत प्रिय है, इसलिए रात्रि जागरण करके शिवलिंग का जलाभिषेक करें। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती के विवाह की कथा जरूर सुनें, रामायण की चौपाइयां पढ़ें। शिवजी को भांग और इत्र बेहद पसंद है, इसलिए भांग व इत्र चढ़ाएं। कालसर्प योग से बचने के लिए शिवलिंग पर चांदी के नाग नागिन चढ़ाएं। शिवजी को जल, दूध, दही, पंचामृत का अभिषेक करें।
विज्ञापन

5 of 7
lord shiva
महाशिवरात्रि पर ऐसे करें शिव पूजा
महाशिवरात्रि पर शिवपूजा करने के लिए सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। घर के आस-पास में शिवालय न हो तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी पूजा की जा सकता है।
विज्ञापन

6 of 7
shivratri - फोटो : amar ujala
जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके महाशिवरात्रि का व्रत समाप्त करें। सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजा आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए। सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन संपन्न होता है। उसके बाद दिन में ब्रह्मभोज भंडारा के द्वारा प्रसाद वितरण कर व्रत संपन्न होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
shivratri - फोटो : amar ujala
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा होगी। रात्रि पहले प्रहर पूजा का समय: शाम 18:05 से 21:20 तक। रात के दूसरा प्रहर में पूजा का समय : रात 21:20 से 00:35 तक। तीसरा प्रहर पूजा का समय = 00:35 से 03:49 तक। चौथा प्रहर पूजा का समय = 03:49 से 07:04 तक। बता दें कि महाशिवरात्रि पर्व मनाने के पीछे दो मान्यताएं हैं- एक, सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था। दूसरा, इस दिन शिव का विवाह पार्वती से हुआ था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें