महाशिवरात्रि पर व्रत रखना है और भगवान भोले को खुश करना चाहते हैं तो पूजा करते समय इन नियमों का पालन करें, सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी।
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जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र सेक्टर-15 के प्रमुख स्वामी राम बहादु़र मिश्र का कहना है कि इस बार शिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी चंद्र है। चंद्रमा मकर राशि में है और ये शनि की राशि है। सूर्य भी शनि की राशि कुंभ में रहेगा। मंगल स्वराशि यानी वृश्चिक राशि में रहेगा। यह योग सभी के लिए अच्छा रहने वाला है। खासतौर पर मकर, कर्क, वालों के लिए भाग्योदय का समय रहेगा। धनु, मिथुन के लिए चिंताएं बढ़ सकती हैं। शेष राशियों के लिए समय सामान्य रहेगा।
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महाशिवरात्रि पर बेलपत्र के अलावा गंगाजल, गन्ने के रस, पंचामृत और कुशा के जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है। इससे विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शिव जी को धतूरा बहुत पसंद होता है, इसलिए महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करें। इससे शत्रुओं का भय दूर होता है, साथ ही धन लाभ मिलता है। सम्भव हो तो चंदन और रुद्राक्ष भी चढ़ाएं।
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शिव जी को रात्रि जागरण अत्यंत प्रिय है, इसलिए रात्रि जागरण करके शिवलिंग का जलाभिषेक करें। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती के विवाह की कथा जरूर सुनें, रामायण की चौपाइयां पढ़ें। शिवजी को भांग और इत्र बेहद पसंद है, इसलिए भांग व इत्र चढ़ाएं। कालसर्प योग से बचने के लिए शिवलिंग पर चांदी के नाग नागिन चढ़ाएं। शिवजी को जल, दूध, दही, पंचामृत का अभिषेक करें।
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महाशिवरात्रि पर ऐसे करें शिव पूजा
महाशिवरात्रि पर शिवपूजा करने के लिए सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। घर के आस-पास में शिवालय न हो तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी पूजा की जा सकता है।
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- फोटो : amar ujala
जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके महाशिवरात्रि का व्रत समाप्त करें। सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजा आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए। सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन संपन्न होता है। उसके बाद दिन में ब्रह्मभोज भंडारा के द्वारा प्रसाद वितरण कर व्रत संपन्न होता है।
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा होगी। रात्रि पहले प्रहर पूजा का समय: शाम 18:05 से 21:20 तक। रात के दूसरा प्रहर में पूजा का समय : रात 21:20 से 00:35 तक। तीसरा प्रहर पूजा का समय = 00:35 से 03:49 तक। चौथा प्रहर पूजा का समय = 03:49 से 07:04 तक। बता दें कि महाशिवरात्रि पर्व मनाने के पीछे दो मान्यताएं हैं- एक, सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था। दूसरा, इस दिन शिव का विवाह पार्वती से हुआ था।