पॉलिथीन हर घर का हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है और इससे होने वाले नुकसार भी खतरनाक हैं।
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डेमो इमेज
पॉलिएथिलीन या पॉलिथीन सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक है। स्वच्छता की रैंकिंग में पिछड़ने पर फजीहत झेल रहे चंडीगढ़ की सुंदरता पर पॉलिथीन का बढ़ता इस्तेमाल किसी धब्बे से कम नहीं है। पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। डेढ़ साल पहले चंडीगढ़ को पॉलिथीन फ्री सिटी घोषित किया गया था। एनजीटी के आदेशों को भी प्रशासन सख्ती से लागू नहीं करा पाया।
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polythene
इसी का नतीजा है कि बाजारों और मंडियों में सरेआम लोग पॉलिथीन के बैग लटकाते खरीददारी करते नजर आते हैं। न तो प्रशासन जागरूकता अभियान चला पाया, न इस पर रोक लगवा पाया। अफसरों का ध्यान सिर्फ चालान काटने पर ही रहा, वह भी यदा कदा। बुधवार को अमर उजाला टीम ने शहर के अलग अलग सेक्टर और मंडियों का जायजा लिया। हर जगह पॉलिथीन का खूब इस्तेमाल दिखा।
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पॉलीथिन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लग सकी
- फोटो : अमर उजाला
मात्र 10 किलोमीटर के दायरे में फैले चंडीगढ़ जैसे शहर में प्रशासन पॉलिथीन व प्लास्टिक पर पूरी तरह बैन लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। जबकि चंडीगढ़ के पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में पॉलिथीन व प्लास्टिक पर बैन को स्थानीय सरकार सख्ती से लागू कर रही है। हिमाचल प्रदेश में जब पॉलिथीन पर पूर्ण पाबंदी लग सकती है तो छोटे से दायरे में फैले चंडीगढ़ में क्यों नहीं।
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polythene bags seized
- फोटो : अमर उजाला
एनजीटी ने दिसंबर 2015 में चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी कर सिटी ब्यूटीफुल में पॉलिथीन व प्लास्टिक पर बैन लगाने को कहा था। एनजीटी के निर्देश पर प्रशासन ने सूचना जारी कर पॉलिथीन व प्लास्टिक के इस्तेमाल पर 500 से 5 हजार रुपये का चालान का प्रावधान तैयार किया था, लेकिन कुछ दिन चालान होते हैं और फिर मुहिम ठंडी पड़ जाती है।
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पालीथिन
पॉलिथीन आज पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। पॉलिथीन का विकल्प होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। पॉलिथीन बनाने में ऐसे जहरीले केमिकल्स इस्तेमाल किया जाते हैं जो पर्यावरण और जीवन के लिए घातक है। चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, प्लास्टिक बैग जहरीले केमिकल्स से बनते हैं। इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ता है।
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पालिथीन जब्त
- फोटो : amarujala
सेक्टर-26, 22, 19, 20, 33, 34, इंडस्ट्रियल एरिया, मोटर मार्केट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड में पॉलिथीन व प्लास्टिक का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इसके अलावा शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगने वाली अपनी मंडी व सब्जी मंडी में भी पॉलिथीन का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। चालान भी काटे जाते हैं, बावजूद इसके पॉलिथीन का यूज बंद नहीं हो पाया।
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पॉलीथीन जब्त करते एएनएम
- फोटो : amarujala
वर्तमान समय में पॉलिथीन का वार्षिक वैश्विक उत्पादन 8 करोड़ टन है। इसका मुख्य उपयोग पैकेजिंग (प्लास्टिक के थैले, प्लास्टिक फिल्में, जीओमेम्ब्रेन, बोतल और अन्य पात्र) बनाने में होता है। पॉलीथीलीन कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से अधिकांश का सूत्र (C2H4)nH2 होता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि पॉलीथीन एक ही प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण होता है।
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पॉलिथीन की बिक्री पर प्रतिबंध
पॉलिइथिलीन एक बहुलक है। यह इथिलीन के अणु द्वारा बनता है। यह एक बहुउपयोगी पदार्थ है। बायोडिग्रेडेबल नहीं होने के कारण इससे भी पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। पॉलिथीन कचरे से देश में प्रतिवर्ष लाखों पशु-पक्षी मौत का ग्रास बन रहे हैं। लोगों में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है तथा भूगर्भीय जलस्त्रोत दूषित हो रहे हैं।
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पॉलिथीन की बिक्री पर प्रतिबंध
- फोटो : amar ujala
प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है और प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है। पॉलिथीन कचरा जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सीन्स जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।
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पॉलिथीन की बिक्री पर प्रतिबंध
पर्यावरण विशेषज्ञ की मानें तो प्लास्टिक कचरे के जमीन में दबने की वजह से वर्षा जल का भूमि में संचरण नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप भूजल स्तर गिरने लगता है। प्लास्टिक कचरा प्राकृतिक चक्र में नहीं जा पाता, जिससे पूरा पर्यावरण चक्र अवरुद्ध हो जाता है। पॉलीथिन पेट्रो-केमिकल उत्पाद है, जिसमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है।
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कपड़े के थैले बांटते लोग
- फोटो : amar ujala
रंगीन पॉलीथिन मुख्यत: लेड, ब्लैक कार्बन, क्रोमियम, कॉपर आदि के महीन कणों से बनता है, जो जीव-जंतुओं व मनुष्यों सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है। पॉलिथीन अपने हर रूप में जानलेवा है। जलाये बिना भी पॉलिथीन लगातार खतरनाक गैसों (बेंजीन, क्लोराइड, विनायल और इथनॉल ऑक्साइड) का उत्सर्जन कर हवा को विषाक्त बनाता रहता है।
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polythene
यही कारण है कि पॉलिथीन फैक्टरी में काम करनेवालों को आम आदमी की तुलना में कैंसर होने का खतरा 80 फीसदी ज्यादा होता है। पॉलिथीन से उत्सर्जित होने वाली गैस इसका इस्तेमाल करने वाले के लिए भी घातक है। लगातार प्लास्टिक की बोतल में पानी या चाय पीने वालों को कैंसर तक हो सकता है। इस्तेमाल के बाद पॉलिथीन को फेंकना भी कम खतरनाक नहीं है।
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पॉलिथीन और प्लास्टिक का इस्तेमाल
- फोटो : amar ujala
जमीन में दबाने पर भूमि को बंजर बनाने के साथ यह स्वच्छ जल के स्रोत (कुआं, चापानल आदि) को प्रदूषित करता है। पॉलिथीन से दूषित पानी पीने से खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, चक्कर आना, मांसपेशियों का शिथिल होना, हृदय रोग से पीड़ित हो सकते हैं। फेंका गया पॉलिथीन पूरे पर्यावरण पर असर डालता है। इससे लगातार निकलनेवाली जहरीली गैस हवा के साथ मिल कर उसे जहरीली बना देती है।
पानी में फेंके जाने पर यह जलचक्र को प्रभावित करता है। पानी के जीवों के असमय मौत का कारण बनता है। जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट कर देता है। मिट्टी भुरभुरा कर भूस्खलन कराने में सहायक होता है। सतही जल प्रदूषित करता है। कुआं और चापानल का पानी जहरीला कर देता है। शहरों में नालियों के जाम होने का सबसे बड़ा कारण है