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नवरात्र स्पेशल: देखिए ऐसा अनोखा देवी मंदिर, जिसमें सिखों की गहरी आस्था है

Thu, 30 Mar 2017 09:16 AM IST
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
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naina devi temple
नवरात्रों के मौके पर हम आपको देवी मां के ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं,  जिसमें सिखों की गहरी आस्था है। चौंक गए न जानकर, खुद देखिए तस्वीरों में।
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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
देवी मां के 52 शक्तिपीठों में से एक ये शक्तिपीठ पंजाब-हिमाचल बार्डर पर स्थित है। नाम है माता नैना देवी का म‌ंदिर। यह हिन्दू-सिखों का सांझा तीर्थ स्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं में 60 फीसदी सिख होते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार, मंदिर में श्रावण अष्टमी के मेले में साठ फीसदी सिख आते हैं। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने माता नैना देवी के मंदिर में तपस्या की थी और एक साल से अधिक समय तक मंदिर में हवन किया था।

यह भी देखें: 175 साल पुराना है माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास, जानिए खास बातें
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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
मान्यता है कि तपस्या व हवन से खुश होकर मां भवानी ने स्वयं प्रकट होकर गुरु जी को प्रसाद के रूप में तलवार भेंट की और गुरू जी को वरदान दिया था कि तुम्हारी विजय होगी और इस धरती पर तुम्हारा पंथ सदैव चलता रहेगा। हवन आदि के बाद जब गुरू जी आनंदपुर साहब की ओर जाने लगे तो उन्होंने अपने तीर की नोक से तांबे की एक प्लेट पर अपने पुरोहित को हुक्मनामा लिखकर दिया, जो आज भी नयना देवी के पंडित बांके बिहारी शर्मा के पास सुरक्षित है।

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नैना देवी का म‌ंदिर
अगस्त 2008 में नैना देवी मंदिर में चट्टान खिसकने की अफवाह के बाद मची भगदड़ में 145 लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के जूते, चप्पल और अन्य सामान बिखरे पड़े होने के बावजूद भक्तों का आना लगातार जारी था। नैना देवी के अवतार के बारे में पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान विश्व के कुल 52 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि मां सती के नयन इसी स्थान पर गिरे थे, इसलिए इस स्थान का नाम नयना देवी पड़ा है। 
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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने खुद को यज्ञ में जिंदा जला दिया, जिससे भगवान शिव व्यथित हो गए। उन्होंने सती के शव को कंधे पर उठाया और तांडव नृत्य शुरू कर दिया। इसने स्वर्ग में सभी देवताओं को भयभीत कर दिया कि भगवान शिव का यह रूप प्रलय ला सकता है। भगवान विष्णु से यह आग्रह किया कि अपने चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में काट दें। श्री नैना देवी मंदिर वह जगह है जहां सती की आंखें गिरीं।
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naina devi temple
एक अन्य कहानी नैना नाम के गुज्जर लड़के की है। एक बार वह अपने मवेशियों को चराने गया और देखा कि एक सफेद गाय अपने थनों से एक पत्थर पर दूध बरसा रही है। उसने कई दिनों तक इसी बात को देखा। एक रात जब वह सो रहा था, उसने देवी मां को सपने मे यह कहते हुए देखा कि वह पत्थर उनकी पिंडी है। नैना ने पूरी स्थिति और उसके सपने के बारे में राजा बीर चंद को बताया। जब राजा ने देखा कि यह वास्तव में हो रहा है, उसने उसी स्थान पर श्री नैना देवी नाम के मंदिर का निर्माण करवाया।
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नयना देवी मंदिर - फोटो : AmarUjala
श्री नैना देवी मंदिर महिशपीठ नाम से भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर मां श्री नैना देवी जी ने महिषासुर का वध किया था। किंवदंतियों के अनुसार, महिषासुर को अमरता का वरदान प्राप्त था, वह एक अविवाहित महिला द्वारा ही परास्त हो सकता था। सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को संयुक्त कर देवी को बनाया। महिषासुर देवी ने शादी का प्रस्ताव देवी के समक्ष रखा। देवी ने कहा कि अगर वह उसे हरा देगा तो वह उससे शादी कर लेगी। देवी ने दानव को परास्त किया और उसकी आंखें निकाल दीं।

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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
माता नैना देवी मंदिर के प्रांगण के आगे एक सैकड़ों वर्ष पुराना पीपल का पेड़ है जिसके बारे में अनेक दंत कथाएं प्रचलित हैं जिनमें से एक यह भी है कि अनेक अवसरों पर इस पीपल के हर पत्ते पर ज्योति जलती दिखाई देती है। माता नयना देवी के भवन के अंदर तीन मूर्तियां हैं जो दर्शनीय है। विशेषता उस अंदर वाली मूर्ति की मानी जाती है जिसके मात्र दो नयन ही दिखाई देते हैं।
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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
मंदिर के साथ ही एक हवन कुंड भी बना हुआ है जिसकी विशेषता है कि इसमें डाली गई सारी सामग्री जल कर उसके बीच में ही समा जाती है टनों भस्म कहां जाती है यह आज तक रहस्य बना हुआ है। भवन से कुछ ही दूरी पर एक प्राचीन गुफा भी है। श्रद्धालु जन उसके भी श्रद्धा भाव से दर्शन करते हैं। भवन से 100 मीटर की दूरी पर एक सरोवर है जिसमें स्नान करना पुण्य माना जाता है।
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