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देखिए एक ऐसा अनोखा मंदिर, जो साल के 8 महीने पानी में डूबा रहता है

Sun, 21 May 2017 09:07 AM IST
amarujala.com- presented by: खुशबू गोयल
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बाथू की लड़ी, देश में एक अनोखा मंदिर
देश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो साल के 8 महीने पानी में डूबा रहता है और इसके नजारे इतने खूबसूरत हैं कि आप इसकी ओर खींचे चले आएंगे।
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बाथू की लड़ी, देश में एक अनोखा मंदिर
पंजाब के तलवाड़ा से करीब 34 किलोमीटर की दूरी पर पोंग डैम की झील के बीच बना एक अद‌्भुत मंदिर, जो साल में सिर्फ चार महीने (मार्च से लेकर जून तक) ही नजर आता है। बाकी समय मंदिर पानी में ही डूबा रहता है। साल के बाकी आठ महीने ये पानी में डूबे रहते हैं, जहां केवल नाव से ही पहुंचा जा सकता है। पानी उतरने के कारण अब ये मंदिर नजर आने लगा है, जिससे यहां पर टूरिस्ट का आना शुरू हो जाएगा।
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बाथू की लड़ी, देश में एक अनोखा मंदिर
मंदिर बहुत ही मजबूत पत्थर से बना है, इसलिए 35 साल पानी में डूबने के बाद यह मंदिर वैसा का वैसा ही है। इस मंदिर के पास एक बहुत ही बड़ा पिल्लर है। जब पौंग डैम झील का पानी काफी ज्यादा होता है तब यह सभी मंदिर पानी में डूब जाते है, लेकिन सिर्फ इस पिल्लर का ऊपरी हिस्सा ही नजर आता है। पिल्लर के अंदर लगभग 200 सीढ़ियां हैं। पिल्लर के ऊपर से 15 किलोमीटर तक झील का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है।

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बाथू की लड़ी, देश में एक अनोखा मंदिर
इस मंदिर के पत्थरों पर माता काली और भगवान गणेश जी के प्रीतिमा बनी हुई है। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु और शेष नाग की मूर्ति रखी हुई है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। मंदिर के आस-पास टापू की तरह जगह है जिसका नाम रेनसर है। रेनसेर में फॉरेस्ट विभाग का गेस्ट हाउस है। यहां पोंग डैम बनने से पहले देश के कोने-कोने से लोग यहां दर्शन करने के लिए आते थे।
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बाथू की लड़ी, देश में एक अनोखा मंदिर
यहां पर कई तरह के प्रवासी पंछी देखे जा सकते हैं। मार्च से जून तक दूर-दूर से पर्यटक इस मंदिर को देखने के लिए आते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए तलवाड़ा से ज्वाली बस द्वारा आया जा सकता है। यहां पर कुल आठ मंदिर हैं, जो कि बाथू नामक पत्थर से बने हैं। इसलिए इसका नाम बाथू की लड़ी पड़ा है। इस मंदिर के पीछे की कहानी और मान्यता बेहद पौराणिक है।
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बाथू की लड़ी, देश में एक अनोखा मंदिर
मान्यता है कि त्रेता युग से पहले अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां आश्रय लिया था और भगवान शिव की पूजा करने के लिए यह मंदिर बनवाया था। महाभारत काल में पांडव ने यहां स्वर्ग जाने के लिए सीढ़ी बनवाने की कोशिश की थी, जो सफल नहीं हो सकी। मिथक है कि इन मंदिरों को पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान केवल एक रात में ही बनवा डाले थे।
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