क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा रहस्यमयी पेड़ था, जिसे काटने पर खून निकला करता था और इसकी निशानी आज भी बाकी है। जानिए कहां था ये?
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एक रहस्यमयी पेड़, जिसे काटने पर खून निकला करता था
जानकर हैरानी होगी कि हरियाणा के पानीपत में यह पेड़ मौजूद था और उसकी जगह पर आज एक स्मारक बना हुआ है जो काफी ऐतिहासिक है। इसके लोग 'काला अंब' मतलब काला आम के नाम से जानते हैं। इसके पीछे की कहानी बड़े-बुजुर्गों के मुंह से सुनी जा सकती है। पानीपत में रहते एक बुजुर्ग ने पेड़ से खून निकलने के पीछे की कहानी सुनाई तो सुनने वाले हैरान रह गए।
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एक रहस्यमयी पेड़, जिसे काटने पर खून निकला करता था
बुजुर्ग बताते हैं कि इस जगह पर एक काफी बड़ा आम का पेड़ होता था। पानीपत में तीन लड़ाइयां लड़ी गईं और इस जगह पर तीसरे युद्ध की निशानी है। तृतीय युद्ध के दौरान तकरीबन 70,000 मराठा सैनिकों को मौत के घाट उतारा गया था। इतना रक्त बहा कि पानीपत की मिट्टी लाल हो गई। उसी मिट्टी में यह आम का पेड़ लगाया गया था, लेकिन वक्त से पहले ही यह पेड़ बड़ा हो गया था। इसके पतों का रंग भी गहरा हरा होता था।
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एक रहस्यमयी पेड़, जिसे काटने पर खून निकला करता था
बुजुर्ग बताते हैं कि आम का यह पेड़ काफी तेजी से बढ़ रहा था। लोगों ने इसके पीछे का कारण लाल मिट्टी को माना, लेकिन जैसे-जैसे यह बड़ा हुआ, इसका रंग काला पड़ गया। उसके बाद जब पेड़ पर लगे आमों को तोड़कर काटा गया तो उनसे खून जैसा लाल रंग रिसता था। कई वर्षों बाद इस पेड़ के सूखने पर इसे कवि पंडित सुगन चंद रईस ने खरीद लिया। सुगन चंद ने इस पेड़ की लकड़ी से खूबसूरत दरवाजे बनवाए।
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यह दरवाजा आज भी पानीपत के म्यूजियम में देखे जा सकते हैं। बुजुर्ग का कहना है कि उसी समय लोगों ने तभी से इस जगह को 'काला अंब' यानी काला आम नाम दे दिया। यह पेड़ बहुत समय तक गायब भी रहा था। आज इस इस जगह पर लोहे की छड़ के साथ ईंट से बना एक स्तंभ है। इस स्तंभ पर अंग्रेज़ी और उर्दू में लड़ाई के बारे में एक संक्षिप्त शिलालेख है। इसके चारों ओर एक लोहे की बाड़ बनी हुई है।
हरियाणा के राज्यपाल की अध्यक्षता में एक सोसायटी इस पर्यटन स्थल के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए कार्य कर रही है। बताया जाता है कि 1761 में अहमद शाह अब्दाली के साथ मराठाओं ने पानीपत की तीसरी लड़ाई लड़ी थी। मराठा सेनाओं का नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ, विश्वासराव और महादाजी शिंदे ने किया था और इस युद्ध का इतिहास किताबों में भी पढ़ने को मिलता है।