पूरी दुनिया में अपने गानों के जरिये धूम मचाने वाले पंजाबी गायक शुभदीप सिंह उर्फ सिद्धू मूसेवाला की हत्या को आज दो साल पूरे हो गए हैं। परिवार और फैंस आज भी न्याय की आस में बैठे हैं। मूसेवाला के शरीर को तो गोलियों से छलनी कर दिया गया था लेकिन वो आज भी अपने चाहने वालों के दिलों में जिंदा है। हत्याकांड के दो साल बाद भी हत्या से जुड़ी ऐसी कई बाते हैं जिन्हें अभी तक लोग नहीं जानते। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ अनसुनी बातें...
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Sidhu moosewala
- फोटो : फाइल
29 मई को हुई थी हत्या
सिद्धू मूसेवाला की हत्या 29 मई 2022 को हुई थी। लेकिन आरोपी इससे पहले भी उसकी जान लेने की कोशिश कर चुके थे। आरोपियों ने 27 मई 2022 को मानसा के बाजार में मूसेवाला की गाड़ियों का पीछा किया था, लेकिन रास्ता भटक जाने कारण वे अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए थे।
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- फोटो : फाइल
हर समय होती थी मूसेवाला की रेकी
सिद्धू मूसेवाला की रेकी करने के लिए विदेश में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के गुर्गे हर समय मूसेवाला की कोठी के बाहर तैनात रहते थे, जो मूसेवाला से जुड़ी हर एक पल की खबर को फोन के जरिये बराड़ को बताते थे।
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- फोटो : फाइल
पार्सल ट्रक में बैठ कर गुजरात गए थे आरोपी
मूसेवाला की हत्या के बाद सभी आरोपी बड़ी आसानी से पंजाब से हरियाणा के फतेहाबाद तक पहुंच गए थे। उसके बाद सभी आरोपी एक पार्सल ट्रक के जरिये गुजरात पहुंच गए थे।
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- फोटो : फाइल
खराब गाड़ी को ठीक करवाने के लिए भेजे थे 40 हजार
मूसेवाला की हत्या के बाद चली पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि जिस बोलेरो गाड़ी को हत्याकांड के लिए प्रयोग किया गया था वो खराब हो गई तो उसे मानसा तलवंडी रोड पर एक ईंट भट्ठे पर खड़ा कर दिया था। उसके बाद शूटर मनप्रीत एवं जगरूप ने उसे गांव मूसे के पास एक वर्कशॉप पर खड़ा कर दिया। इस गाड़ी को ठीक करवाने के लिए गोल्डी ने केशव के भाई कमल के खाते में चालीस हजार रुपये भेजे थे।
जांच के दौरान पता चला कि 27 मई को मूसेवाला के घर के आगे खड़े गोल्डी के गुर्गों ने आरोपियों को सूचना दी कि सिद्धू की गाड़ी मानसा के बाजार की तरफ चली गई है। इसके बाद आरोपी मनप्रीत, जगरूप, फौजी और कशिश बलेरो गाड़ी में सवार हो गए और उन्होंने सिद्धू की गाड़ियों का पीछा किया। इसी दौरान फौजी ने अंकित को फोन किया कि उनकी गाड़ी पीछे रह गई, उन्हें साथ लेकर जाएं। इस पर अंकित ने केशव को वापस बलेरो गाड़ी के पास भेज दिया।
27 मई को ही मनप्रीत एवं जगरूप शूटर ने फौजी, अंकित के साथ मिलकर सिद्धू मूसेवाला की हत्या करने की योजना बनाई थी, लेकिन सभी आरोपी आपस में बिछड़ गए जिस कारण उस दिन हत्या की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद सभी आरोपी फतेहाबाद चले गए थे और आल्टो गाड़ी में सवार दीपक मुंडी एवं निक्कू अपने उकलाने वाले कमरे में चले गए थे।
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28 मई को सुरक्षा वापस लेने के बाद फिर बना प्लान
जांच में खुलासा हुआ कि 28 मई को विदेश में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने फौजी को फोन कर सूचना दी कि सिद्धू की सुरक्षा वापिस ले ली गई है, तुम कल जल्दी मानसा पहुंच जाना तुम्हें वहां पर मनप्रीत एवं जगरूप मिलेंगे। 29 मई को सभी आरोपी बलेरो गाड़ी पर शाम करीब साढ़े चार बजे मानसा सरदूलगढ़ रोड पर बने होटल में पहुंच गए, जहां पर चाय पानी पीने के बाद फौजी ने केशव को आल्टो कार दे दी और फौजी, कशिश, अंकित और दीपक मुंडी बलेरो गाड़ी लेकर मूसा गांव की तरफ चल दिए।
फौजी ने केशव को कहा था कि तुम आल्टो कार लेकर वहीं रुको अगर काम हो गया तो वहीं पर वापस आ जाएंगे। इसके बाद केशव आल्टो कार लेकर झुनीर की तरफ चला गया था। करीब डेढ़ घंटे बाद केशव के पास फौजी का फोन आया कि उन्होंने काम कर दिया है, वे वापिस आ रहे हैं।
मूसेवाला की हत्या के बीस-पच्चीस मिनट बाद फिर से फौजी ने केशव को फोन किया था कि वो रास्ता भटक गए हैं और किसी पानी वाली टंकी के पास खड़े है। गोल्डी भी बार बार केशव को फोन कर रहा था कि तुम जल्दी से जल्दी से फौजी समेत सभी साथियों को अपने साथ कर लो और अगर उनको रास्ता नहीं पता चल रहा तो तुम अपनी लोकेशन भेज दो। जितने समय तक केशव अपने साथी फौजी तक नहीं पहुंचा था, उतना समय सभी आरोपी गांव रल्ला रोड पर खेतों में छिपे रहे थे।
जांच में खुलासा हुआ कि जब केशव अपने साथी फौजी के पास खेतों में पहुंचा तो सभी आरोपी आल्टो कार में सवार हो गए, जिसके बाद फौजी ने गोल्डी को फोन कर केशव के साथ बात करवाई। इसके बाद गोल्डी ने केशव को आदेश दिए कि वह सभी को साथ लेकर फतेहाबाद चला जाए। गोल्डी ने रास्ते में केशव को फोन कर बताया था कि फतेहाबाद पहुंचने से पहले ही रास्ते में एक क्रेटा गाड़ी मिलेगी जो सबको आगे लेकर जाएगी।
मनाया था जश्न
जांच में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी मूसेवाला की हत्या के बाद बड़ी आसानी के साथ पंजाब से हरियाणा में दाखिल हो गए थे। जब सभी आरोपी फतेहाबाद के साबरिया होटल में पहुंचे तो उन्होंने वहां पर जश्न मनाया, इसी दौरान आरोपी फौजी एवं कशिश जब हथियार चेक कर रहे थे तो कशिश से गलती के साथ गोली चल गई थी। इसके बाद सचिन भिवानी अगले दिन इनके पास आया और सभी हथियारों को अपनी क्रेटा गाड़ी में रख लिया था।
जांच में खुलासा हुआ कि सचिन भिवानी ही अपने अन्य साथियों की सहायता से सभी आरोपियों को पार्सल ट्रक में चढ़ाकर गुजरात तक ले गया था। गुजरात के मुदरा एवं अहमदाबाद में आरोपी रहे। इसी दौरान आरोपी केशव ग्यारह हजार रुपये नकद लेकर अहमदाबाद से मुंबई चला गया था, जहां उसको जब उसका दोस्त नहीं मिला तो वह फिर वापस मुंबई से अहमदाबाद आ गया था। करीब आठ-नौ दिन गुजरात में जब आरोपी रहे तो उसके बाद कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो गई थी।