आखिरकार दो साल का मासूम फतेहवीर सिंह जिंदगी की जंग हार ही गया। 109 घंटे बाद उसे उसी बोरवेल से निकाला गया, जिसमें वह गिरा था और कैसे निकाला गया, इसका असली सच सामने आया है।
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बोरवेल से निकाला गया फतेहवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
फतेहवीर को मंगलवार तड़के बोरवेल से निकाला गया, वो भी कुंडी से खींचकर। गांव के ही एक युवक ने उसे बाहर निकाला। ऐसे में न एनडीआरएफ की कारगुजारी काम आई और न ही कोई तकनीक, मशीन। बताया जा रहा है कि जिस बोर में फतेह फंसा था, उससे दुर्गंध आ रही थी। लोगों को और मीडिया को बोरवेल तक जाने नहीं दिया जा रहा है। यहां तक की आखिरी समय में पूरे ऑपरेशन को लोगों से और मीडिया से छिपाने की कोशिश भी की गई।
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बोरवेल से निकाला गया फतेहवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
फिर जैसे ही फतेहवीर को निकाला गया, तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। फतेहवीर के मां-बाप को भी पहले ही अस्पताल भेज दिया गया था। वहां बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया। ढाई घंटे के सफर के बाद बच्चा पीजीआई पहुंचा, जहां उसकी मौत हो गई। लोग फतेह को निकालने में हुई देरी, एनडीआरएफ की कार्यप्रणाली और प्रशासन की कारगुजारी पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
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बोरवेल से निकाला गया फतेहवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
फतेहवीर को निकालने के लिए पांच दिन चले ऑपरेशन को देखकर लोग भड़क गए और उन्होंने हाईवे जाम कर दिया है। लोगों का कहना है कि बच्चे को बचाने के लिए बोरवेल के समांतर एक दूसरा बोरवेल खोदा गया था और उसमें कंक्रीट के बने 36 इंच व्यास के पाइप डाले गए थे। रविवार आधी रात तक सौ फुट गहरी सुरंग खोद दी गई थी, लेकिन इसे जब बोरवेल से मिलाया गया तो इसकी दिशा गलत हो गई।
बोरवेल से निकाला गया फतेहवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार सुबह इसे बोर से मिलाने का काम शुरू किया गया, लेकिन इसका मिलान जमीन के अंदर बने एक दूसरे बोरवेल से हो गया। यह देखकर लोग भड़क गए और उन्होंने एनडीआरएफ की टीम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इसके बार नए सिर से काम शुरू हुआ, लेकिन नई सुरंग की गहराई पुराने बोर से ज्यादा हो गई। सोमवार शाम पांच बजे पुराने बोर का निचला भाग मिलने का दावा किया गया, लेकिन फतेह को निकालने की जद्दोजहद रात तक जारी रही।