रामबाई
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रामबाई का कहना है कि वह बचपन से ही देसी खुराक (घी, दही, चूरमा, दही और मैसी रोटी) की शौकीन हैं। यह आहार ही उनकी लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का आधार है। एक शताब्दी से अधिक उम्र पार करने के बाद भी उन्हें किसी प्रकार की कोई शारीरिक परेशानी नहीं है। इस उम्र में भी नियमित सैर करती हैं।