फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

T20 में 72 गेंदों में कैसे जमाया तिहरा शतक, सामने आया असली सच

Tue, 21 Feb 2017 09:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 8
टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
21 साल के छोरे ने टी20 मैंच में 72 गेंदों में 300 रन बनाकर इतिहास रच दिया, लेकिन इसके पीछे का असली सच तो कुछ और ही है। आप भी जानिए।
विज्ञापन

2 of 8
मोहित अहलावत
बात हो रही है, पानीपत के तहसील कैम्प के रहने वाले मोहित अहलावत की। मोहित टी20 मैच में तिहरा शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। यह वो कारनामा है, जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है। दिल्ली के ललिता पार्क में खेली जा रही फ्रैंड्स प्रीमियर लीग के इस मैच में 72 गेंदों में 300 रन की नाबाद पारी खेली। उन्होंने 39 छक्के और 14 चौके जड़े।
विज्ञापन

3 of 8
मोहित अहलावत
पर क्या आप जानते हैं कि मोहित ने जिस मैदान पर यह कारनामा कर दिखाया वह इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंट से काफी छोटा है। यही कारण है कि वे इतने रन बनाने में कामयाब रहे। इस मैदान की बाउंड्री सिर्फ 40 गज की थी जो कि अंतरराष्ट्रीय मैदान से छोटी है। औसतन अंतरराष्ट्रीय मैदान की बाउंड्री की लंबाई लगभग 65 से 70 गज की होती है। मैदान में इनर सर्किल 30 गज का होता है, जिसमें पावरप्ले के हिसाब से 4 या 5 खिलाड़ी होते हैं।

4 of 8
मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
बता दें कि मोहित ने 17 गेंदों में फिफ्टी बनाई। इससे पहले युवराज इंग्लैंड के खिलाफ महज 12 गेंद में अर्धशतक लगा चुके हैं। एक ओवर में सबसे ज्यादा 36 रन युवी के नाम। मोहित 34 रन बना सके। मोहित लगातार 5 छक्के लगा सके, जबकि युवी 6 छक्के लगा चुके हैं। स्कोर बोर्ड के अनुसार, मोहित ने 39 छक्के और 14 चौके के अलावा 6 सिंगल और 3 डबल भी लिए। इस तरह स्कोर 302 रन होना था। स्कोर बोर्ड पर 300 रन ही लिखे हैं।
विज्ञापन

5 of 8
मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
मोहित का परिवार मूलत: पानीपत के गांव बबैल गांव का रहने वाला है। पिता पवन अहलावत टेम्पो चलाते हैं। मां एक छोटे स्कूल में टीचर हैं। मोहित ने क्रिकेट को तीन साल पहले ही गंभीरता से लेना शुरू किया था। प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें बड़ी लीग के लिए चुना जाने लगा। मोहित अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने पिता पवन अहलावत को देते हैं।
विज्ञापन

6 of 8
टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
मोहित के पिता पवन अहलावत ने बताया कि उन्हें क्रिकेट खेलने का जुनून था। स्कूल स्टेट क्रिकेट प्रतियोगिता में विकेट कीपर व बल्लेबाजी में बेहतरीन प्रदर्शन किया। बाद में घर की आर्थिक स्थित कमजोर होने के कारण दसवीं के बाद पढ़ाई व क्रिकेट छोड़ना पड़ा। परिवार चलाने के लिए टेंपो चलाने लगे। शौकिया तौर पर क्रिकेट जारी रखा। बेटे मोहित को भी मैदान में साथ ले जाते थे। मोहित ने इच्छा जताई कि वह भी विकेटकीपर और बल्लेबाज बनना चाहता है।
विज्ञापन

7 of 8
मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
पवन बताते हैं कि सैंट मैरी स्कूल में मोहित का दाखिला कराया तो उसका पढ़ाई में कम, क्रिकेट में ज्यादा मन लगता था। शिक्षक ने कह दिया था कि यह पढ़ाई में अच्छा नहीं है, इसे तो क्रिकेटर बना दीजिए। उन्होंने मोहित में अपना अक्स देखा और दसवीं के बाद मोहित को 2012 में बहादुरगढ़ बालाजी क्रिकेट एकेडमी में छोड़ दिया। वहां मोहित को खेलते देख क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज प्रभावित हुए और वे उसे दिल्ली के लाल बहादुर क्रिकेट अकादमी ले गए।
विज्ञापन

8 of 8
मोहित अहलावत
पवन ने बताया कि उनके दोस्त बबैल के रविंद्र ने फोन कर बताया कि मोहित ने बड़ी पारी खेली है। उन्होंने मोहित को फोन किया तो वह बोला कि मैं ठीक खेला हूं। पापा मैंने कर दिखाया है। अब रणजी में अच्छा खेलकर टीम इंडिया में जगह बनानी है। मोहित अहलावत दिल्ली की ओर से तीन रणजी खेल चुके हैं। मोहित का रणजी के लिए ऋषभ पंत से चयन हो गया था। तीन मैच भी खेले, लेकिन चल नहीं पाया। सफलता के लिए भाग्य के साथ मेहनत बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें