फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tokyo olympic 2021: पिता का अधूरा सपना पूरा करने की ख्वाहिश, तोहफे में पदक देने की तमन्ना, ऐसी है सीमा बिसला की कहानी

Fri, 23 Jul 2021 04:08 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 5
पहलवान सीमा बिसला। - फोटो : @OLySeema
पापा, मुझे ओलंपिक खेलने दो फिर आप जहां कहोगे, शादी कर लूंगी। देश के लिए मेडल लाने की भूख और अपने पिता का सपना पूरा करने ओलंपिक दंगल में उतरी पहलवान सीमा बिसला का यही कहना है। यह भावुक बात करने वाली गुढान की साहसी बेटी का पिता से मेडल का तोहफा देने का वादा है। अपने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए इस बेटी ने टोक्यो ओलंपिक के लिए कूच कर दिया है। कलानौर के गुढान निवासी कबड्डी खिलाड़ी आजाद सिंह की बेटी सीमा बिसला अंतरराष्ट्रीय पहलवान है। यह बेटी अपने पिता का ओलंपिक में मेडल जीतकर नाम रोशन करने का सपना पूरा करने ओलंपिक दंगल में उतरेगी। बेटी का कहना है कि पिता आजाद सिंह देश के लिए खेलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना चाहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने व संसाधनों के अभाव में वे अपना यह सपना पूरा नहीं कर सके। 
 
विज्ञापन

2 of 5
पहलवान सीमा बिसला। - फोटो : @KirenRijiju
पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे होने के कारण खेल पर ध्यान देने के बजाय खेती करनी पड़ी। इसी के सहारे अपने पांच बच्चों का लालन पालन किया। उन्हें पढ़ा-लिखा कर काबिल बनने का सबक सिखाया।
विज्ञापन

3 of 5
पहलवान सीमा बिसला। - फोटो : @OLySeema
पहलवान सीमा अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। इसे पिता के सपने का पता लगा तो वह खेल के मैदान में उतरी। उसने पहलवानी में रुचि दिखाई और ओलंपिक में जगह बनाई।

4 of 5
पहलवान सीमा बिसला। - फोटो : फाइल
बुल्गारिया के सोफिया में हुई ओलंपिक क्वालीफायर विश्व कुश्ती में सिल्वर मेडल के साथ ओलंपिक कोटा हासिल किया। ओलंपिक के लिए रवाना होने से पहले गुरुग्राम में अभ्यास किया। पदक की दौड़ में अव्वल आने के लिए इस बेटी ने रोजाना पांच घंटे कड़ी मेहनत की।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
टोक्यो ओलंपिक - फोटो : सोशल मीडिया
कॉमनवेल्थ खेलों में जीता गोल्ड
खेल कोटे में मिली रेलवे की नौकरी छोड़ कोच की नौकरी अपनाने वाली सीमा ने 25 वर्ष की उम्र में देश के लिए मेडल जीता। वर्ष 2018 में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में उसने गोल्ड जीत कर अपने इरादे साफ कर दिए। इससे पूर्व भी वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं। विश्व चैंपियनशिप में भी वह कांस्य पदक जीत चुकी हैं। सीमा 1999 से कुश्ती खेल रही हैं। वर्ष 2004 से ईश्वर दहिया के अखाड़े में कुश्ती के दांवपेंच सीखना शुरू किया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें