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सेना के ऑपरेशन से आतंकियों में बढ़ी बेचैनी, घुसपैठ मुश्किल हुई तो अपना रहे ये तरीका

Sat, 14 Oct 2017 09:04 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
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kashmir valley
घाटी में सेना को फ्री हैंड देने के बाद से ही पाक समर्थित आतंकी संगठनों की बेचैनी बढ़ी है। इसी वजह से इन दिनों घाटी में आतंकियों के लिए घुसपैठ थोड़ी मुश्किल हो गई है। 
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terrorist - फोटो : FILE PHOTO
पिछले करीबन एक साल से घाटी में सैन्य अभियानों की तेजी के बाद से आतंकी संगठनों में जबरदस्त खलबली का माहौल है। ये संगठन आतंकियों को पाक अधिकृत कश्मीर में ट्रेनिंग दिलवाकर ट्रेंड आतंकियों को बड़ी संख्या में एलओसी पार घाटी को दहलाने लिए भेजते हैं। लेकिन पिछले एक साल से संगठनों के लिए ऐसा करना आसान नहीं रहा। 
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Terrorist - फोटो : google
इसलिए इन संगठनों ने अब घाटी के पहाड़ी जंगलों में ही आतंकी ट्रेनिंग शुरू  करवा दी है। ये संगठन घाटी के स्थानीय किशोरों व युवाओं को टारगेट पर रखते हैं, उनके  जहन में जेहाद का जहर भरते हैं और फिर उन्हें आतंकी ट्रेनिंग के लिए तैयार करते हैं। पहले घाटी के इन किशोरों व युवाओं को संगठनों द्वारा आतंकी ट्रेनिंग केलिए एलओसी पार आतंकी कैंपों में ले जाया जाता था। 

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terrorist - फोटो : Demo Photo
चूंकि अब सरहद पार करना मुश्किल हो चुका है, लिहाजा इन आतंकी संगठनों ने घाटी के गुमराह किए किशोरों व युवाओं के लिए यहीं पहाड़ी जंगलों में ट्रेनिंग कैंपों का इंतजाम कर दिया है। सेना की खुफिया एजेंसियां भी लगातार  घाटी में चल रहे इन आतंकी कैंपों पर काम कर रही है। घाटी में कई साल गुजार चुके सेना के रिटायर्ड एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी बताया कि अब घाटी में ही स्थानीय आतंकी कैंप लगाए जा रहे हैं। 
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- फोटो : File Photo
नाम नहीं छापने का शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि हर साल सितंबर और अक्तूबर में सबसे ज्यादा घुसपैठ होती थी। नवंबर में बर्फबारी से पहले ही हथियारों समेत आतंकी एलओसी पार से घाटी में घुस जाते हैं, लेकिन इस साल सेना के जबरदस्त एक्शन मोड की वजह से इन दोनों महीनों में घाटी से घुसपैठ अपेक्षाकृत बहुत कम रही। उल्लेखनीय है कि एक्शन में आई सेना इस साल अभी तक घाटी में करीबन 169 आतंकी मार चुकी है और अपने भी लगभग 61 जवान शहीद हो चुके हैं।
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आतंकवादी
सुरंगें घुसपैठ का सेफ जरिया 
सेना के रिटायर्ड आला अफसर केअनुसार एलओसी एरिया में सुरंगे आतंकियों के लिए घुसपैठ का सेफ जरिया है। इसलिए एलओसी पर सुरंगें बनाए जाने के बहुत ज्यादा  प्रयास होते हैं और रेगुलर रैकी में ये पकड़ी भी जाती है। इन्ही सुरंगों के जरिए आतंकी और हथियार घाटी में पहुंचते हैं। उनके अनुसार घाटी में सेना फ्री हैंड से खासी उत्साहित है, इसीलिए आतंकी खेमों में जबरदस्त बेचैनी का माहौल है। अफसर ने बताया कि पंजाब, राजस्थान और गुजरात बार्डर पर आतंकियों की कम नशा तस्करों की ज्यादा घुसपैठ रहती है। जबकि ज्यादातर आतंकी घाटी में एलओसी से ही देश में हथियारों संग दाखिल होते हैं।     
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