व्यापारियों के लिए जरूरी खबर। 10 रुपये का सिक्का आपके खिलाफ एफआईआर करवा सकता है, जेल भी हो सकती है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
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बैंक अधिकारियों की मानें तो असली नोट या सिक्का लेने से इंकार करने वाले लोगों को जेल तक हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने पर पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ चालान करके न्यायालय से सजा दिला सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने दस रुपये का सिक्का चलन से बाहर नहीं किया है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
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गौरतलब है कि बाजार में छोटे दुकानदार और रेहड़ी वाले दस रुपये के सिक्के लेने से इंकार कर रहे हैं। सबसे अधिक समस्या सब्जी मंडी में और ऑटो का इस्तेमाल करने वाले लोगों के साथ आ रही है। सब्जी मंडी रेहड़ीवाले 10 रुपये का सिक्का लेने से इंकार कर रहे हैं। हालांकि 5 रुपये के सिक्कों की नकली खेप मिलने पर इसको लेकर भी विवाद शुरू हो गया है। उपभोक्ता भी भ्रमित होकर 10 रुपये के सिक्के को चलन से बाहर मानने लगे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
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बैंकों में दस रुपये के सिक्के लिए जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति या दुकानदार दस रुपये का सिक्का लेने से मना करता है, तो उसके खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। उसके खिलाफ भारतीय मुद्रा अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। असली सिक्का लेने से मना करना कानूनन गलत और भारतीय मुद्रा का अपमान है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
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यह है सजा का प्रावधान: नोट या सिक्के का जाली मुद्रण, जाली नोट या सिक्के चलाना और सही सिक्कों को लेने से मना करना भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत अपराध है। इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक दंड, कारावास अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
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ऐसे करें नकली-असली की पहचान: असली दस रुपए का सिक्का डबल डाई से तैयार किया जाता है। नकली सिक्के में भी डबल डाई का प्रयोग किया गया है, लेकिन ध्यान से देखने पर इन्हें पहचाना जा सकता है। असली सिक्कों में पीले भाग का रंग हलका हैं, जबकि नकली में पीला भाग ब्राइट है।
असली सिक्का शार्प है, जबकि नकली सिक्का थोड़ा खुरदरा है और साइज में भी फर्क है। नकली सिक्के छोटे हैं और इनका वजन भी कम है। खास बात यह है कि नकली सिक्के का पीला भाग जोर देने पर निकल सकता है। जबकि असली में ऐसा नहीं है।