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तस्वीरें: 7 पेज के सुसाइड नोट में शहादत पर खुलासे

Wed, 29 Oct 2014 12:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहादुरगढ़(हरियाणा)
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भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में जवान के आत्महत्या से पहले लिखे 7 पेज के सुसाइड नोट ने साथी जवान की 'शहादत' पर सवाल खड़े कर दिए। गांव आसौदा के रहने वाले जवान मदन ने सोमवार देर रात रोहतक-दिल्ली रेल ट्रैक पर अपने गांव के पास ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले मदन ने सात पेज का सुसाइड नोट लिखकर आईटीबीपी में तीन अधिकारियों के रवैये पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
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इस पर राजकीय रेलवे पुलिस ने उसके भाई पवन की शिकायत पर अज्ञात पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही उसने दिवाली की रात कैथल के जवान कपिल शर्मा की मौत पर भी सवालिया निशान लगाया गया है। सुसाइड नोट में लिखा गया है कि कपिल शर्मा और उसने अधिकारियों की मानसिक प्रताड़ना से आकर जान दी, जबकि कपिल के परिजनों को बताया गया था कि उसकी मौत नक्सली हमले में हुई है।
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गांव आसौदा टोडराण का 31 वर्षीय मदन दलाल आईटीबीपी में सिपाही था। वह 18वीं बटालियन में वाहन चलाता था और फिलहाल छत्तीसगढ़ के राजनांद गांव तहसील में सीतागांव के मोहल्ला मानपुर में तैनात था। दिवाली के दिन मदन के सहकर्मी व दोस्त कैथल निवासी कपिल शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। इससे पहले अधिकारियों के दुर्व्यवहार की वजह से कपिल और वह काफी परेशान थे।

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सुसाइड नोट में लिखा है कि मदन ने कपिल के पार्थिव शरीर को उसके घर पहुंचाने के लिए एंबुलेंस से रायपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया। वापसी में उसने अपने अधिकारियों के समक्ष कपिल की मौत के कारणों पर शक व्यक्त कर दिया। सुसाइड नोट के अनुसार, इस पर अधिकारी भड़क गए और मदन की राइफल छीनकर उसे मारने की कोशिश की।
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उसने खुदकुशी से पहले घटनास्थल पर फोन करके परिजनों को बुला लिया। उसके सामान की तलाशी में सुसाइड नोट मिला। आईटीबीपी के पीआरओ सुबोध ने बताया कि शायद आईटीबीपी जवान मदन कई दिन से छुट्टी पर था। उसके द्वारा खुदकुशी करने और कथित सुसाइड नोट में बल के तीन अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच होगी। इस पर मदन किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग आया और सोमवार रात उसने खुदकुशी कर ली।
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अपने सुसाइड नोट में आईटीबीपी 18-बीएन-सी कंपनी के जवान झज्जर जिला के गांव आसौदा निवासी मदन कुमार ने जिक्र किया है कि-23 तारीख को शायद दीपावली थी, आपको भी याद होगा, उस दिन सुबह सीता गांव, मोहला मानपुर, तहसील राजनांदगांव में सुबह 8 या 9 बजे(छुट्टी थी इसीलिए लेट थोड़ा) फ्रैश होने जा रहा था तो मुझे आईटीबीपी एक जवान कपिल शर्मा मिला, जो काफी परेशान लग रहा था।
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मुझे बताया कि किसी छोटी-मोटी बात पर साहब(प्रवीण कुमार) ने 150 तो गालियां सुना दीं और दिमाग अलग खराब कर दिया। मैंने बोला भाई कोई बात नहीं, मैं भी तो साढ़े छह वर्ष से खा रहा हूं, तू भी खा ले। इसके बाद करीब साढ़े 10 व ग्यारह बजे के बीच मुझे चारपाई पर आवाज सुनाई दी तो लोग कहने लगे, दीपावली है, सभी सीपीजी वाले पटाखे जला रहे हैं।

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लेकिन जब तक लोग पहुंचे, तब तक उसकी तलाशी ले ली गई थी और बाद में सीपीजी(छत्तीसगढ़ पुलिस) को बुलाया गया। बाद में कपिल शर्मा की बॉडी को एंबुलेंस में डालकर मानपुर में पोस्टमार्टम करवाया गया। मानपुर से 7 बजे निकले। इसके बाद राजनांदगांव में बॉडी के पास बर्फ रखी गई, वहां से वे उसे ढाई बजे अंबेडकर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। इसी बीच मैंने यहां हो रही मौतों पर सवाल उठाया तो मेरे साथ जो एसओ थे, वे गर्म हो गए।

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अधिकारियों के कहने के बाद उसने मेरे से सारी राइफल, राऊंड ले लिए और मेरी ही राइफल से मुझे मारने का प्रयास किया। लेकिन मैं किसी तरह वहां से भागकर एक पत्रकार और कांग्रेस नेता की मदद से रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। अपने सुसाइड नोट में उसने यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ पुलिस भी आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ मिली हुई है। सुसाईड नोट में मदन ने यह भी खुल्लासा किया है कि अब तक वहां चार से पांच जवानों की मौत हो चुकी है।
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मदन लाल ने खुलासा किया है कि अधिकारी जवानों को प्रताड़ित करते हैं। यदि जवान जवाब देता है तो उसके खिलाफ मनमर्जी की देशद्रोही, अफीम, गांजा आदि रखने की रिपोर्ट तैयार कर देते हैं या फिर उसकी हत्या करके सुसाइड का रंग दे देते हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस भी उनके अधिकारियों की ही मानती है। कपिल की मौत को लेकर पहले ही पशोपेश में उसके परिजनों ने इस खुल्लासे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाकर न्याय दिलवाने की मांग की है।
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