सुखना लेकर पर सैर करने के लिए जाने से पहले यह खबर जरूर पढ़ लें, नहीं तो पछताएंगे। लेने के देने भी पड़ सकते हैं, अस्पताल तक पहुंच सकते हैं।
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दरअसल, सुखना लेक की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही। पहले पानी का संकट और अब कुत्तों का आतंक। सुबह के वक्त सैर करने वाले एक्सरसाइज कम बल्कि कुत्तों से बचते ज्यादा दिखते हैं। हर वक्त डर रहता है कि कहीं कोई कुत्ता उन्हें काट न ले। आए दिन कुत्ता काटने की खबर की दहशत सुबह सैर करने वालों के चेहरे पर साफ तौर पर दिखती है।
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इस मुद्दे पर नगर निगम ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। उसका कहना है कि साल 2001 में नियम बने थे, उसके मुताबिक कानून में प्रावधान है कि नसबंदी के बाद कुत्ते को उसी जगह पर छोड़ना अनिवार्य है, जहां से उसे उठाया गया था। इसलिए कुत्तों को सुखना से हटाना मुश्किल है।सुखना लेक के रेगुलेटरी एंड पर करीब 20 से 22 कुत्ते अलग- अलग झुंड में घूमते हैं। वे सैर करने वाले का पीछा करते हैं।
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कभी दौड़ते हुए लोगों को काटने का प्रयास करते हैं। लोगों ने बताया कि कई बार तो महिलाओं का दुपट्टा भी खींचने का प्रयास करते हैं। लोगों का कहना है कि मछलियों की तलाश में कुत्ते अक्सर सुखना में आते हैं। कुछ दिन पहले सुखना के मेन एंट्रेस पर काफी मात्रा में मरी हुई मछलियां पाई गई थी, तब से मछलियों की तलाश में कुत्ते आने लगे हैं। अब मछलियां हैं नहीं तो वह ट्रैक पर बैठे रहते हैं।
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हाईकोर्ट ने भी दिखाई थी सख्ती
सुखना में कुत्तों की बढ़ती संख्या हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कुत्तों के आतंक पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए एमसी चंडीगढ़ को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के आदेश दिए थे। इस पर निगम ने दलील दी थी कि कुत्तों को लेकर 2001 के नियम हैं जिसके चलते ऐसे प्रावधान हैं कि नसबंदी करने के बाद कुत्तों को वहीं छोडऩा अनिवार्य है, जहां से उनको उठाया गया था।
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ये नियम आ रहे हैं आड़े
केंद्र ने 24 दिसंबर 2001 को एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) 2001 के रूल्स तैयार किए थे। इन नियमों के सेक्शन-4 में स्ट्रे डॉग्स के लिए विशेष प्रवधान दिया गया है। स्ट्रे डाग्स को एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता अगर नसबंदी और एंटी रेबिज वैक्सिन के लिए किसी जगह से डाग को उठाया जाता है तो उसे बाद में उसी जगह पर छोड़ा जाना जरूरी है।
स्ट्रे डाग की नसबंदी और वैक्सीनेशन का काम हो रहा है। सुखना को डाग फ्री बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन कुछ कानून आड़े आ गए। कुत्तों को रखने के लिए डाग पौंड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन इस पर प्रशासन राजी नहीं हुआ। इसका एक यही विकल्प है।
- आशा जसवाल, मेयर चंडीगढ़