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बच्चों को सेक्स एजूकेशन पर फिल्म अभिनेत्री की बेबाक राय

Wed, 30 Dec 2015 11:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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बच्चों को सेक्स शिक्षा दी जाए या नहीं जैसे विवादित मुद्दे पर फिल्म अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने दी अपनी बेबाक राय। देखिए तस्वीरों में।
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बच्चों को सेक्स एजूकेशन पर फिल्म अभिनेत्री की बेबाक राय

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बच्चों को सेक्स शिक्षा दी जाए या नहीं जैसे विवादित मुद्दे पर इस फिल्म अभिनेत्री ने दी अपनी बेबाक राय। दरअसल फिल्म अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने सोमवार को हरियाणा के रोहतक स्थित एमडीयू में सामाजिक संस्था ‘ब्रेकथ्रू’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा, बच्चे राह से न भटक न जाएं, इसके लिए स्कूलों और घरों में सेक्स एजुकेशन पर बात करनी जरूरी है।'
 
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उन्होंने कहा कि अभिभावक भी इस मुद्दे पर अपने बच्चों से खुलकर बात करें। उन्होंने कहा कि लड़कियों को काम के लिए बेहतर माहौल देना हर संस्थान की जिम्मेदारी है। आज वह खुद भी फिल्म इंडस्ट्री में अपना अच्छा आउटपुट दे पा रही हैं तो इसके पीछे मुख्य वजह सुरक्षित माहौल है। पिछले 10-15 वर्षों में फिल्म इंडस्ट्री का माहौल बदला है। अब प्रॉड्यूसर, निर्देशक और पर्दे के पीछे काम करने वाली टीम में भी काफी संख्या में महिलाएं हैं। इस वजह से बदलाव भी आ रहा है।
 

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कुरैशी ने कहा कि ब्रेकथ्रू का भी यही मिशन है कि जितनी ज्यादा औरतें होंगी, यह दुनिया उनके लिए और भी बेहतर होगी। वहीं महिलाओं को ही महिला की दुश्‍मन बताते हुए हुमा ने कहा कि लंबे अरसे से पुरुष सत्ता समाज के चलते महिलाओं की रूढ़िवादी मानसिकता बन गई है। इस वजह से एक औरत दूसरी औरत की बड़ी दुश्मन है। पर, अब यह सोच बदलनी होगी। महिला और पुरुष दोनों की मानसिकता बदलने की जरूरत है।
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एमडीयू के राधाकृष्णन सभागार में ब्रेकथ्रू के ‘मिशन हजार’ अभियान के राज्यस्तरीय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंची बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने कहा कि फर्क इससे नहीं पड़ता है कि बेटा-बेटी एक्टर, इंस्पेक्टर बने या डॉक्टर। जरूरी यह है कि समाज में लड़कियों को सुरक्षित महसूस करने लायक माहाल दिया जाए ताकि वो पढ़ सकें। बेहतर समाज बनाने की इस लड़ाई को हम लड़कियां अकेले नहीं लड़ सकती है। इसके लिए अपने माता-पिता, भाई और दोस्तों को शिक्षित करने के साथ-साथ उनकी रुढ़िवादी सोच बदलने की जरूरत है।
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अभिनेत्री कुरैशी ने सबसे पहले सभागार में मौजूद नारी शक्ति को ‘नमस्कार’ किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह करीब 18-19 साल की होंगी, जब एनजीओ ब्रेकथ्रू के साथ जुड़ी थीं। उस समय की बातों को याद करते हुए उन्होंने कहा, तब वह खुद महरून रंग का कमीज और काले रंग की सलवार पहनकर लिंग भेद और लिंग चयन के खिलाफ नाटक के जरिए ही लोगों को जागरूक करती थीं। इस कार्यक्रम के नाटक को देखकर मुझे अपने गार्गी कॉलेज की याद आ गई। इससे पहले, कुरैशी ने प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों के साथ सिरसा की रोडवेज महिला चालक और गुलाबी ऑटो महिला चालकों को सम्मानित किया।
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हुमा कुरैशी ने कहा कि उनकी परवरिश दिल्ली में हुई है। उनके घर में बेटा-बेटी को लेकर उल्टा था। उनके मां-बाप बेटी चाहते थे, इसलिए तीन बेटे पैदा हुए। हम चार भाई-बहन हैं। चूंकि, मम्मी अपने मायके में टॉम ब्वॉय रही हैं। इसलिए वह हमेशा यही चाहती थी कि उनकी बेटी खूब पढ़े-लिखे। कॉलेज टाइम के दौरान उन्होंने जब अपने पेरेंट्स के समक्ष बॉलीवुड में एक्टिंग करने की बात जाहिर की तो पहले इसे मजाक की तरह लिया। फिर, उनकी मां ने कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह इस क्षेत्र में जा सकती है।
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