गुरुद्वारा श्री रबाबसर से 550 रबाबी सिंह रबाब व तंती साजों के साथ सुल्तानपुर लोधी स्थित गुरुद्वारा बेर साहिब पहुंचे और 550वें प्रकाश पर्व समागम का आगाज किया, देखिए तस्वीरें।
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मूल मंत्र का जाप करते 550 रबाबी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
आज एक नवंबर से श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर आयोजित भव्य कार्यक्रम का आगाज हुआ, जो आठ नवंबर तक जारी रहेगा। कार्यक्रम का आयोजन कपूरथला में सुल्तानपुर लोधी स्थित गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में किया जा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशानुसार एसजीपीसी द्वारा इस शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
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मूल मंत्र का जाप करते 550 रबाबी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम के आयोजन की इंचार्ज बीबी जागीर कौर हैं और पूरा आयोजन एसजीपीसी प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल की देखरेख में हो रहा है। 9 से 12 नवंबर तक मुख्य समागम गुरुद्वारा बेर साहिब से 100 मीटर की दूरी पर स्थित गुरु नानक स्टेडियम में बने मुख्य पंडाल में होगा।
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मूल मंत्र का जाप करते 550 रबाबी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले सुबह 4 बजे से 6:30 बजे हजूरी रागी श्री हरमंदिर साहिब के भाई रणधीर सिंह जी ने 'आसा दी वार' की। इसके बाद साढ़े छह बजे से सात बजे तक अरदास व हुक्मनामा हुआ। 7 से 8 बजे तक हजूरी रागी श्री हरमंदिर साहिब श्री अमृतसर भाई गगनदीप सिंह जी ने बिलावल की चौकी लगाई। 8 बजे से साढ़े 9 बजे तक बाबा जगजीत सिंह जी हरक्खोवाल वाले ने शबद विचार किया।
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मूल मंत्र का जाप करते 550 रबाबी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब के दो आब (दरिया) ब्यास-सतलुज के बीच स्थित गुरुद्वारा श्री रबाबसर का नाता बाबा नानक जी के साथ साया बनकर उदासियों पर जाने वाले भाई मरदाना जी से है। बाबा नानक ने इसी गुरुद्वारा साहिब में भाई मरदाना को रबाब लेने के लिए भेजा था। 550वें प्रकाश पर्व का आगाज एक बार फिर उसी परपंरा से हुआ। इसी गुरुद्वारा साहिब से 550 रबाबी सिंह रबाब व तंती साजों के साथ गुरुद्वारा बेर साहिब पहुंचे।
मूल मंत्र का जाप करते 550 रबाबी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
शिअद किसान विंग के प्रधान जत्थेदार शमशेर सिंह भरोआना ने बताया कि एसजीपीसी की ओर से देश भर की संगीतक अकादमियों से 550 रबाबी सिंहों का चयन किया गया है। 50 ट्रालियों में 11-11 रबाबी सिंहों सजकर नगर कीर्तन के रूप में गुरुद्वारा बेर साहिब पहुंचे। जहां पर सभी ने एकसुर में मूलमंत्र का जाप करके 550वें प्रकाश पर्व का आगाज किया। संगत भाई मरदाना जी के उसी मार्ग से पैदल चलकर सुल्तानपुर लोधी पहुंची।