भारत मां के बहादुर बेटे को शत शत नमन, जिसने 160 बच्चों की जान बचाई और दे गया अपनी जान। जानिए कौन है ये वीर सपूत और इनके बारे में सब कुछ।
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भारतीय जवान जसप्रीत सिंह शहीद
कहता था मुझे दो कर्ज उतारने हैं, एक भारत मां का और दूसरा परिवार का। 160 बच्चों की जान बचाकर उसने भारत मां का कर्ज उतार दिया, ये जवान था पंजाब के मोगा का रहने वाला जसप्रीत सिंह। जिले के गांव तलवंडी मल्लियां का यह 24 साल का गबरू राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में घायल हो गया था।
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भारतीय जवान जसप्रीत सिंह शहीद
घायल जसप्रीत को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लेकिन जान देने से पहले इस बहादुर बेटे ने 160 बच्चों की जान बचाई। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की और जानकारी जसप्रीत के परिजनों तक पहुंचाई। जैसे ही घर में खबर पहुंची, कोहराम मच गया। जसप्रीत के मां बाप और भाई बहनों का रो रोकर बुरा हाल है।
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इंडियन आर्मी की मार से घबराया पाक
- फोटो : PTI
शहीद के पिता स्वर्ण सिंह ने बताया कि जसप्रीत में बचपन से ही देशसेवा करने का जज्बा था। वो कहता था, पिताजी मैं बड़ा होकर सैनिक बनूंगा तथा देश के लिए शहीद होकर गांव व आपका नाम रोशन करूंगा। आज उसने अपनी बात सच करके दिखा दी, लेकिन मुझे अब चिंता है कि मैं परिवार का कर्ज कैसे उतारुंगा। जसप्रीत परिवार का इकलौता सहारा था, वो भी छोड़कर चला गया।
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सीमा पर तैनात जवान
- फोटो : File Photo
जसप्रीत सिंह की मां हरजिंद्र कौर का रो रो कर बुरा हाल है। उन्होंने रोते रोते बताया कि जसप्रीत 9 महीने पहले घर आया था और बहन परविंदर कौर की शादी की थी। इसके लिए उसने डेढ़ लाख का कर्ज लिया था। दो भाई कुलदीप सिंह और गोपी अभी पढ़ रहे हैं। छोटी बहन वीरपाल कौर भी पढ़ रही है, लेकिन अब सभी का क्या होगा। पढ़ाई कैसे पूरी होगी, कर्ज कैसे उतरेगा।
शहीद जसप्रीत के पिता स्वर्ण सिंह ने बताया कि जस्सी लगभग 4 वर्ष पहले भारतीय सेना की 8 सिख लाई यूनिट में भर्ती हुआ था। 12वीं तक की प्रारंभिक शिक्षा जस्सी ने गांव के ही स्कूल से प्राप्त की थी। कारीगरी में माहिर था, उसके बावजूद वह सेना में भर्ती हुआ। आजकल नौशेरा सेक्टर में तैनात था कि पाकिस्तान के सीजफायर ने उसकी जान ले ली।