फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

6 अजूबे सांप, न कभी देखे होंगे न सुने होंगे...ये खबर पढ़ लेंगे तो बचाव कर सकेंगे, वरना पछताएंगे

Wed, 05 Sep 2018 04:18 PM IST
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 9
Snake
कई तरह के सांप देखे होंगे, लेकिन इन 6 अजूबे सांपों को न कभी देखा होगा और न ही इनके बारे में कहीं सुना होगा। खतरनाक होते हैं, ये खबर पढ़ लेंगे तो बचाव कर सकेंगे।
विज्ञापन

2 of 9
snake
बारिश का मौसम है, तो चंडीगढ़ में सांपों का खतरा बढ़ गया है। रिहायशी इलाकों से लेकर जंगली क्षेत्रों तक में सांप निकलने की शिकायतें लगातार वाइल्ड लाइफ टीम को मिल रही हैं। खास बात यह है कि इन सांपों में कोबरा जैसे खतरनाक सांप भी शामिल हैं। इस सीजन में वाइल्ड लाइफ टीम ने शिकायतों के आधार पर विभिन्न प्रजाति के 119 सांप पकड़े हैं। टीम को विभिन्न जंगली जानवरों को लेकर इस सीजन में कुल 1614 शिकायतें प्राप्त हुईं थीं, जिनमें 326 जानवरों को टीम की ओर से पकड़ा गया।
विज्ञापन

3 of 9
snake
पकड़े गए सांपों में कोबरा सहित कई जहरीले प्रजाति के सांप भी मिले। सर्प विशेषज्ञों के अनुसारए रसल वाइपर, करैत, कोबरा व वाइपर जैसी जहरीली प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं। दरअसल, गर्मी के  मौसम में ऊष्मा से बचने के लिए अधिकतर सांप जमीन के अंदर बिलों में चले जाते हैं। बारिश के मौसम में बिलों में पानी भर जाता है, जिस कारण सांप बिल से बाहर निकल आते हैं। ऐसे में लोगों को इनके बारे में जानना चाहिए और इनसे बचाव के तरीके भी पता होने चाहिएं।

4 of 9
common krait snake
कॉमन करैत
मानसून सीजन शुरू होते ही कॉमन करैत बिल के बाहर आ जाते हैं। यह देश के सबसे जहरीलों सांपों में से एक है। यह आम तौर पर रात के वक्त काटता है। खासतौर पर रात 12 बजे से लेकर सुबह चार बजे के बीच, जब लोग सो रहे होते हैं। जंगल से निकलकर यह जमीन पर पड़े बिस्तर में घुसने की कोशिश करता है, ताकि उसे गरमाहट मिल पाए। यह जमीन पर सो रहे लोगों के साथ चिपक भी जाता है। जब लोग हिलते-ढुलते हैं तो यह काट लेता है। जब यह काटता है तो लोगों को बिल्कुल भी अहसास नहीं होता। लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उसे किसी चींटी या मच्छर ने काटा हो। यह मुख्य रूप से कान के पास, गले, चेस्ट और पेट पर काटता है। कई बार देखा गया है कि सोते वक्त जब कॉमन करैत किसी व्यक्ति को काटता है तो वह सोता ही रह जाता है। इसके काटने से मरीजों में न्यूरोपैरालाइसिस होता है और दम घुटने लगता है। इसके काटने पर 60 प्रतिशत व्यक्तियों की मौत हो जाती है। इसकी लंबाई 100 सेंटीमीटर होती है। बीच-बीच में सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। पानी के साथ लगते गार्डन और फार्म हाउस में पाया जाता है। जब कॉमन करैत काटता है तो बिना देर किए मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। यह चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में पाया जाता है।
विज्ञापन

5 of 9
रसेल वाइपर स्नेक
रसेल वाइपर 
यह अजगर जैसा दिखता है। खाकी रंग के साथ इस पर गहरे भूरे रंग के फूल जैसे बने होते हैं। यह अक्सर सूखे पत्तों, झाड़ियों, खेती बाड़ी और पानी वाली जगहों पर मिलता है। सुखना लेक और रॉक गार्डन के आसपास अक्सर देखा जाता है। बहुत कम बार यह साफ जगहों पर देखा जाता है। यह ऐसे नहीं काटता, जब किसी का पैर इस पर पड़ता है तो यह बचाव में काट लेता है। इसके काटने से सबसे ज्यादा किसानों की मौत होती है। जब यह काटता है तो कई लोग समझते हैं कि अजगर ने काट लिया। इस लापरवाही के कारण लोग इलाज नहीं कराते और उनकी मौत हो जाती है। यह सालभर दिखते हैं। ठंड के वक्त यह झाड़ियों में धूप सेंकने भी निकलता है। रसेल वाइपर के काटने पर बहुत तेजी से दर्द होता है। उसके बाद शरीर में सूजन, उल्टियां, ब्लीडिंग और किडनी फेल हो जाती हैं।
विज्ञापन

6 of 9
सांप
कोबरा
इसकी गिनती भी जहरीले सांपों में होती है। यह तीन तरह का होता है। पहला चित्तीदार, काला और भूरे रंग का। रसेल वाइपर के मुकाबले इसकी फुहार कम होती है। यह लोगों से दूर रहना चाहता है, लेकिन चूहों का बहुत शौकीन होता है। चूहों के चक्कर में यह घर के किचन, स्टोर रूम और बाथरूम में घुसकर बैठ जाता है। यह तभी काटता है, जब किसी व्यक्ति का पैर या फिर हाथ लग जाए। इस इलाके में कोबरा सबसे ज्यादा पाया जाता है। यह कम से कम छह फुट लंबा होता है। इसके काटने पर भी व्यक्ति की मौत हो जाती है।
विज्ञापन

7 of 9
rat snake
रेट स्नैक 
रेट स्नैक में जहर बिल्कुल भी नहीं पाया जाता। यह मुख्य रूप से गिलहरी, चिड़िया और उनके अंडे खाने का शौकीन होता है। चूहों को भी खाता है। गिलहरी और चिड़ियां के अंडे को खाने के लिए यह पेड़ों पर भी चढ़ जाता है। इसके काटने पर थोड़ी घबराहट होती है, लेकिन मौत का खतरा नहीं रहता। यह कई बार पेड़ों के सहारे घर के अंदर तक घुस जाता है। कई बार सांप विशेषज्ञ सलीम ने कूलर और एसी के अंदर से रेट स्नैक को पकड़ा है।

8 of 9
Wolf Snake
चेकर्ड कीलबैक
यह पानी वाली जगहों के आसपास पाया जाता है। धनास लेक  और घग्गर के इसे देखा जा सकता है। यह मुख्य रूप से मछली और मेंढक खाने का शौकीन होता है। कई बार पानी की तलाश में नाले के सहारे किचन या कमोड में पहुंच जाता है। सांप की यह प्रजाति भी शहर में काफी पाई जाती है। इसमें जहर बिल्कुल नहीं होता।

वूल्फ स्नैक 
पंजाब यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाकों में यह काफी पाया जाता है। यह बिना प्लास्टर वाली दीवारों पर आसानी से चढ़ जाता है। यह छिपकली के बच्चों और कॉकरोच खाने का शौकीन होता है। गहरे ब्राउन कलर होने के साथ यह ज्यादा मोटा नहीं होता। इसमें पीले रंग की धारियां होती हैं। इसमें भी जहर बिल्कुल नहीं पाया जाता।
विज्ञापन

9 of 9
Python
अजगर
इस इलाके में अजगर भी काफी पाया जाता है। सुखना लेक, घग्गरपुल या फिर ट्यूबवेल के आसपास कई बार इसे पकड़ा गया है। रॉक गार्डन से कई बार अजगर के बच्चों को पकड़ा गया है। आमतौर पर यह सर्दियों के मौसम में ज्यादा दिखता है।

झाड़-फूंक के बजाय नजदीकी अस्पताल ले जाएं
पीजीआई व प्राइवेट हास्पिटल के विशेषज्ञ बताते हैं कि सांप काटने पर मरीज को झाड़-फूंक या किसी देसी दवा दिलाने के बजाय उसे नजदीकी अस्पताल ले जाएं। मानसूनी सीजन में अस्पताल में एंटी वैनम वैक्सीन जिला और अस्पताल प्रशासन को प्राथमिकता के तौर पर उपलब्ध कराना चाहिए। पीजीआई में हर वक्त एंटी वैनम मौजूद रहती है। कई बार तो सांप काटने वाले पेशेंट में एंटी वैनम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें