16 लोग ठूंस-ठूंसकर भरे हुए थे और टक्कर के बाद गाड़ी गहरी खाई में गिर गई और 6 लोगों की ऐसी हालत हो गई, देख नहीं पाएगा कोई।
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बुद्ध पूर्णिमा पर बाबा बड़भाग सिंह गुरुद्वारा मैड़ी में माथा टेककर लौट रहे पंजाब के श्रद्धालुओं से भरी ओवरलोड क्वालिस 50 फीट गहरी खाई में जा गिरी गई। हादसे में चार महिलाओं समेत 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक बच्चा बाल- बाल बच गया। घायलों का अंब और ऊना अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
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हादसा सोमवार सुबह साढ़े 8 बजे हुआ। आठ सीटर गाड़ी में 16 लोग ठूंस-ठूंसकर भरे हुए थे। बैग और अन्य सामान भी पैरों में रखा हुआ था। आगे वाली सीट पर चालक के अलावा तीन और लोग बैठे थे। मैड़ी से एक किमी आगे तीखे मोड़ पर सामने से आ रहे टेंपो को पास देते समय चालक ने नियंत्रण खो दिया और गाड़ी खाई में गिर गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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पुलिस के अनुसार, पंजाब के गुरदासपुर के खजाला गांव की स्वर्ण कौर (50) गुरदयाल सिंह की क्वालिस में संगत को लेकर अंब के मैड़ी में बाबा बड़भाग सिंह में माथा टेकने आई। गाड़ी में चार बच्चों समेत 16 लोग सवार थे। लौटते समय हादसे का शिकार हो गए। दुर्घटना की वजह ओवरलोडिंग बताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने क्वालिस चालक को उपचार के बाद हिरासत में ले लिया है। डीएसपी अंब मनोज जंबाल ने हादसे की पुष्टि की है।
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हादसे में इनकी गई जान
मृतकों में सुरिंद्र सिंह (45) पुत्र सरवण सिंह, कश्मीर कौर पत्नी सरवण सिंह निवासी बटाला गुरदासपुर, हरदीप सिंह (25) पुत्र हजारा सिंह निवासी उधनवाल, बटाला और हरजिंद्र कौर पत्नी लक्खा सिंह निवासी तरसीका अमृतसर है। दो महिलाओं की अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है। वहीं हादसे के समय तीन माह का आकाशदीप भी अपनी मां निम्मो की गोद में था, लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आई। हालांकि, उसकी मां चोटिल हुई है।
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बताया जा रहा है कि क्वालिस में ठूंस-ठूंस कर भरे गए 16 यात्री सवार थे। सवारियों के घुटनों पर बड़े-बड़े बैग रखे थे। चालक के साथ एक आदमी के लिए बैठने के लिए बनी सीट पर तीन आदमी बैठे थे। ऐसी स्थिति में चालक किस तरह से गाड़ी में गियर कैसे बदलना है और स्टीयरिंग कैसे मुड़ेगा, समझ से परे है। पहाड़ी रास्तों में ऐसे हालात में दुर्घटना होना कोई हैरानी की बात नहीं।
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घायलों में सिर्फ कार का चालक ही ऐसा शख्स था, जो अपने पैरों पर चल रहा था। चालक ने अपनी जान बचाते हुए जब जीप खाई में गिरी तो उसने बाहर छलांग लगा ली। मैड़ी मेला संभवतया प्रदेश का एकमात्र ऐसा मेला है जिसमें हमेशा से ही प्रतिबंध के बावजूद मालवाहक वाहनों में डबल डेक बनाकर क्षमता से दो से तीन गुना ज्यादा सवारियां ठूंसी जाती हैं।
हर साल चलता है मौत का खेल
मैड़ी क्षेत्र में यह पहला हादसा नहीं है जिसमें ओवरलोडिंग से किसी श्रद्धालु की मौत हुई हो। इससे पहले भी मेले के दौरान सड़क हादसों में कई श्रद्धालु मौत का ग्रास बन चुके हैं। इन हादसों के बाद भी न तो पंजाबी श्रद्धालु सीख ले रहे हैं और न ही पुलिस प्रशासन कोई सख्त कार्रवाई कर रहा है। इनके हौसले इस तरह बुलंद हैं कि नौ सवारियों की जगह 16 सवारियां ढोई जा रही हैं।