क्या आप जानते हैं कि देश में कश्मीर से अलग एक और जगह ऐसी है, जो स्वर्ग से भी कहीं ज्यादा सुंदर और अद्भुत है। यकीं नहीं आता तो खुद देख लीजिए।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
हम बात कर रहे हैं, सिखों की अटूट आस्था के प्रतीक श्री हेमकुंड साहिब की। उत्तराखंड के चमौली में स्थित श्री हेमकुंडसाहिब के कपाट वीरवार सुबह करीब 6 माह बाद खोल दिए गए। बुधवार सुबह करीब 10 बजे गोविंद घाट गुरुद्वारे में अरदास शब्द कीर्तन के बाद पहला जत्था रवाना किया गया था। यहां पंजाब समेत कई राज्यों से हजारों की संख्या में संगत पहुंच चुकी है।
विज्ञापन
3 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
15200 फीट की ऊंचाई पर बने श्री हेमकुंडसाहिब गुरुद्वारा 6 महीने तक बर्फ से ढका रहता है। इसके कपाट अब सर्दियां आने तक खुले रहेंगे। यात्रा पर जाने वाले लोगों के लिए बॉयोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है। इसके बिना किसी को आगे नहीं जाने दिया जाएगा। श्री हेमकुंडसाहिब अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है और यह देश के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है।
4 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
गुरूद्वारे के पास ही एक सरोवर है। इस पवित्र जगह को अमृत सरोवर अर्थात अमृत का तालाब कहा जाता है। यह सरोवर लगभग 400 गज लंबा और 200 गज चौड़ा है। यह चारों तरफ से हिमालय की सात चोटियों से घिरा हुआ है। इन चोटियों का रंग वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार अपने आप बदल जाता है। कुछ समय वे बर्फ सी सफेद, कुछ समय सुनहरे रंग की, कभी लाल रंग की और कभी-कभी भूरे नीले रंग की दिखती हैं।
विज्ञापन
5 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
इस पवित्र स्थल को रामायण के समय से मौजूद माना गया है। कहा जाता है कि लोकपाल वही जगह है जहां श्री लक्ष्मण जी अपना मनभावन स्थान होने के कारण ध्यान पर बैठ गए थे। कहा जाता है कि अपने पहले के अवतार में गोबिंद सिंह जी ध्यान के लिए यहां आए थे। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस जगह के बारे में अपने अनुभवों का उल्लेख किया है।
विज्ञापन
6 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
श्री हेमकुंडसाहिब के बारे में कहा जाता है कि यह दो से अधिक सदियों तक गुमनामी में रही। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस जगह के बारे में बताया, तब यह अस्तित्व में आई। सिख इतिहासकार-कवि भाई संतोख सिंह (1787-1843) ने इस जगह का विस्तृत वर्णन दुष्ट दमन की कहानी में अपनी कल्पना में किया था। उन्होंने इसमें गुरु का अर्थ शाब्दिक शब्द 'बुराई के विजेता' के लिए चुना है।
विज्ञापन
7 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, इसकी सात पर्वत चोटियों की चट्टान पर एक निशान साहिब सजा हुआ है। यहां पर गोविन्दघाट से होते हुए ऋषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग पर जाया जा सकता है। गोविन्दघाट के पास मुख्य शहर जोशीमठ है। हेमकुंडएक संस्कृत नाम है जिसका अर्थ है- हेम (बर्फ) और कुंड (कटोरा) है। दशम ग्रंथ के अनुसार, यह वह जगह है, जहां पांडु राजा अभ्यास योग करते थे।
8 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
इसके अलावा दशम ग्रंथ में यह कहा गया है कि जब पाण्डु हेमकुंडपहाड़ पर गहरे ध्यान में थे तो भगवान ने उन्हें सिख गुरु गोबिंद सिंह के रूप में यहां पर जन्म लेने का आदेश दिया था। उन्नीसवीं सदी के निर्मला विद्वान पंडित तारा सिंह नरोत्तम हेमकुंडकी भौगोलिक स्थिति का पता लगाने वाले वो पहले सिख थे। 1884 में प्रकाशित श्री गुड़ तीरथ संग्रह में उन्होंने इसका वर्णन 508 सिख धार्मिक स्थलों में से एक के रूप में किया है।
9 of 10
श्री हेमकुंड साहिब
प्रसिद्ध सिख विद्वान भाई वीर सिंह ने हेमकुंड की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हेमकुंडसाहिब कि बारे में भाई वीर सिंह का वर्णन पढ़कर ही सेना से रिटायर संत सोहन सिंह ने इस जगह को तलाशने का फैसला किया, जो वर्ष 1934 में सफल हो गया। संत सोहन सिंह इस जगह को तलाशते हुए झील तक पहुंचे, जिसे आज लोकपाल के नाम से जाना जाता है।
1937 में यहां गुरु ग्रंथ साहिब को स्थापित किया गया। 1939 में संत सोहन सिंह ने अपनी मौत से पहले हेमकुंडसाहिब के विकास का काम जारी रखने के मिशन को मोहन सिंह को सौंप दिया। गोबिंद धाम में पहली संरचना को मोहन सिंह द्वारा निर्मित कराया गया था। 1960 में अपनी मृत्यु से पहले मोहन सिंह ने एक सात सदस्यीय कमेटी बनाकर इस तीर्थ यात्रा के संचालन की निगरानी दे दी।