खुश रहते हैं, पल भर में उदास हो जाते हैं तो ये एक मानसिक बीमारी है। इसलिए शादी न करें और बिल्कुल भी शर्म न करें, वरना जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
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इस मानसिक रोग का नाम है मूड डिसआर्डर, बायपोलर डिसऑर्डर जिससे पीड़ित व्यक्ति के लिए शादी एक तरह के तनाव का काम कर सकती है। पीजीआई के मनोचिकित्सक डिपार्टमेंट ने अपनी एक स्टडी में पाया है कि शादी के बाद बायपोलर डिसऑर्डर के मरीजों में बीमारी के दोबारा लौटने के लक्षण पाए गए हैं। करीब 23.3 प्रतिशत मरीजों में ऐसा देखने को मिला है। साथ ही 24.7 फीसदी मरीजों में बांझपन भी पाया गया है।
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यह स्टडी जुलाई 2016 से लेकर फरवरी 2017 तक आए करीब 219 मरीजों में की गई है। हाल ही में यह स्टडी एशियन साइक्रेट्री जरनल में प्रकाशित हुई है। स्टडी के दौरान यह भी देखने को मिला है कि करीब एक चौथाई मरीजों ने अपने जीवनकाल के दौरान कम से कम एक बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की। पीजीआई की स्टडी के मुताबिक, कई अन्य देशों की स्टडी में भी पीड़ितों की शादी के बाद दोबारा से बीमारी लौटने के प्रमाण मिले हैं।
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इन स्टडी में भी बताया गया है कि शादी के बाद मरीज तनाव में जा सकते हैं। 75 फीसदी मरीजों का एक बच्चा, जबकि दो तिहाई जोड़ों के दो या उसके अधिक बच्चे रहे हैं। 24.7 फीसदी में बांझपन देखने को मिला, जबकि 6.8 फीसदी मरीज गर्भधारण की कोशिश कर रहे थे, लेकिन असमर्थ रहे। शोधकर्ताओं ने अपने रिसर्च पेपर में बताया है कि इन मरीजों में बांझपन का अनुपात एनएफएचएस-3 में आए डाटा के मुकाबले 13 गुना ज्यादा है।
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मनोचिकित्सक के मुताबिक, बायपोलर को मूड डिसऑर्डर भी माना जाता है। इसके चार स्टेप होते हैं। सीवियर डिप्रेशन, नॉर्मल मूड, हाइपोमेनिया और मेनिया या मेनिक साइकोसिस। पहले स्टेज में पीड़ित बहुत गहरे अवसाद में होते हैं। पीड़ित मरीज को कुछ भी अच्छा नहीं लगता। दूसरी स्टेज में पीड़ित का मूड स्थिर होता है, मगर हाइपोमेनिया की स्थिति आने पर पीड़ित बहुत ज्यादा खुश रहता है। वह पहले से ज्यादा नरमदिल और दयालु बन जाता है।
इस बीमार में पीड़ित शख्स कई बार जरूरत से ज्यादा दानपुण्य करने लगता है। चौथी स्टेज मेनिया या मेनिक साइकोसिस की होती है और इसमें रोगी की खुशी की पराकाष्ठा होती है। वह खुद को राजा-महाराजा समझने लगता है। भावनाओं में बहकर वह अपनी संपत्ति को दूसरों के नाम भी कर सकता है। इस स्थिति में पीड़ित की निर्णय क्षमता प्रभावित हो जाती है। कई बार वह अपने क्रियाकलापों को लेकर हाइपर एक्टिव हो जाता है।