फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिलिए 81 साल की नेशनल शूटर दादी से, निशाना ऐसा अचूक सब हैरान

Fri, 09 Dec 2016 09:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
इन्हें शूटर दादी कहें या रिवॉल्वर रानी। 81 साल की उम्र तक आते-आते 25 से ज्यादा नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में मेडल जीत डाले। जानिए, इनका बैकग्राउंड।
विज्ञापन

2 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
चंद्रो यूपी के बागपत जिले के जोहड़ी गांव की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 81 साल 11 महीने है। 65 साल की उम्र में इन्होंने पहली बार बंदूक उठाई थी। एक दिन वे अपनी पोती शेफाली को लेकर भारतीय निशानेबाज डॉक्टर राजपाल सिंह की शूटिंग रेंज पर गई, शैफाली के अलावा और कोई लड़की नहीं आती थी।
विज्ञापन

3 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
दो दिन देखा, तीसरे दिन शैफाली गन लोड नहीं कर पाई। मैंने गन लोड करके निशाना लगाया तो सटीक लगा। निशाना दस अंकों पर लगा देख राजपाल आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने कहा-दादी तू भी शूटिंग शुरू कर दे. इसके बाद निशानेबाजी का सिलसिला चल पड़ा। उनके नाम 25 राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप का खिताब है।

4 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
डॉ. राजपाल व बच्चों ने खेलने के लिए प्रेरित किया। मैंने मना किया तो बच्चों ने कहा, गांव में किसी से नहीं कहेंगे। फिर प्रेक्टिस शुरू की। रात को परिवार में सब सो जाते थे तब मैं भूसा वाले कमरे में जताकर पानी से भरा जग घंटों हाथ में लेकर खड़ी रहती थी। जिससे गन से निशाना लगाते समय हाथ सधा रहे।
विज्ञापन

5 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
अखबार में फोटो देखकर छुपा दिया : जब वह राजपाल की एकेडमी में शूटिंग की कोचिंग ले रही थी, तो किसी पत्रकार ने समाचार पत्र में फोटो प्रकाशित कर दिया। अगले दिन मैंने फोटो देखा, तो परेशान हो गई। मैं पढ़ना, तो नहीं जानती थी, लेकिन अपना फोटो देखकर सारा मामला जान गई।
विज्ञापन

6 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
कही घर वाले को इस बारे में पता न लग जाए, इसलिए अखबार छुपाकर रख दिया। लेकिन मेरे बेटों को पता लगा गया। बेटों ने मुझे शूटिंग के लिए प्रेरित किया। बेटियों को दबाकर रखा है, ये तो बहुत अच्छा काम करै सै अभी तक बेटियों को दबाकर रखा है, म्हारी बेटी तो बहुत अच्छा करै सै। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
शूटर चंद्रो देवी तोमर
हालांकि कुछ दिनों से वे शूटिंग नहीं कर रही और सारा ध्यान गांव की बहू बेटियों को सिखाने में दे रही हैं। सिरसा के कॉलेजों में भी वे ट्रेनिंग देती हैं। चंद्रो बताती हैं कि निशाना लगाना उन्हें बचपन से भाता था लेकिन कभी इस ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिला। आज देश की सही मायनों की वो रिवाल्वर रानी हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें