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CWG 2018: पदक जीतने के बाद भी खुश नहीं अंकुर मित्तल, भावुक हुए...साझा किया 'दर्द'

Sun, 22 Apr 2018 04:00 PM IST
अंकित चौहान/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
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अंकुर मित्तल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में देश के लिए पदक जीत लिया, उसके बावजूद शूटर अंकुर मित्तल खुश नहीं है। वे भावुक हो गए और दिल का दर्द साझा किया।
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अंकुर मित्तल
कांस्य पदक जीतकर शूटर अंकुर मित्तल खुश नहीं हैं। पिता को फोन करके उन्होंने कहा कि पापा मैं तो गोल्ड मेडल जीतने आया था। इस पर उनके पिता अशोक मित्तल ने कहा कि कोई बात नहीं बेटा। देश के लिए खेलते रहो। गोल्ड मेडल जीतने के कई मौके मिलेंगे। अंकुर मित्तल मूलरूप से भटगांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार कुछ समय पहले सोनीपत में आकर रहने लगा था।

 
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अंकुर मित्तल
इस समय अंकुर की प्रैक्टिस के कारण परिवार दिल्ली में रहता है। अंकुर के साथ उनके पिता अशोक, भाई अजय, मां संतोष सोनीपत आते रहते हैं। अंकुर के पिता अशोक ने बताया कि साल 2011 में इटली में हुए जूनियर शूटिंग वर्ल्ड कप के डबल ट्रैप राइफल में अंकुर ने पहली बार देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। इसके पीछे मुड़कर नहीं देखा। कांस्य मेडल जीतने के बाद अंकुर निराश हो गया था।

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अंकुर मित्तल
उसे समझाया गया है कि इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियाड भी होने है। फिलहाल वह जो मिला है उसे पाने की खुशी मनाए। इसके बाद अंकुर ने अपनी मां संतोष से फोन पर बात की तो उन्होंने भी उसका हौसला बढ़ाया।
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अंकुर मित्तल
नेशनल में मेडल जीत चुके है अंकुर, उनका भाई और पिता
अंकुर के पिता अशोक मित्तल ने बताया कि उन्होंने नेशनल स्तर पर मेडल जीता है। अंकुर का भाई अजय इंटरनेशनल शूटर रहा है। अंकुर के कोच भी उसके पिता अशोक ही हैं। इन तीनों के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है, जिसमें अंकुर, उनके भाई अजय व पिता अशोक ने रांची में 2011 में हुए नेशनल गेम्स में टीम इवेंट में एक साथ खेलते हुए कांस्य पदक जीता है।
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अंकुर मित्तल
अंकुर के ब्रोंज जीतने पर घर में खुशी मनाई
अंकुर मित्तल के कांस्य मेडल जीतते हुए परिजनों ने टीवी पर देखा तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों के पास तुरंत बेटे के मेडल जीतने पर बधाई के लिए फोन आने लगे। अंकुर के पिता अशोक काफी समय से भारतीय व हरियाणा राइफल एसोसिएशन दोनों जगह सचिव हैं। परिजनों ने अंकुर के मेडल जीतने पर मिठाई बांटकर खुशी मनाई।

 
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अंकुर मित्तल
अंकुर के 45 लाख दबाए बैठी सरकार
सरकार भले ही सबसे बेहतर खेल नीति होने का दावा करती हो, लेकिन लाड़ियों को आज भी उनका हक नहीं मिल पाता है। ऐसे ही डबल ट्रैप राइफल में कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को ब्रांज मेडल दिलाने वाले शूटर अंकुर मित्तल है, जिनका लगभग 45 लाख सरकार दबाए बैठी है। क्योंकि अंकुर ने पिछले चार साल में जितने मेडल जीते हैं और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है, उनका इनाम लेने के लिए आवेदन करने के बावजूद नहीं दिया जा रहा है।

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अंकुर मित्तल
सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले अंकुर मित्तल ने 2010 में शूटिंग शुरू की तो उसने एक ही सपना देखा था कि देश के लिए मेडल जीतकर शिखर पर पहुंचना है। अंकुर का यह सपना साकार होता जा रहा है और वह देश के लिए दर्जनों मेडल जीत चुका है। उसने 2017 में मैक्सिको में हुए वर्ल्ड कप में चैंपियन बनने के साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप मास्को में सिल्वर मेडल भी जीता तो इस साल ही कई अन्य इतिहास रचे।

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अंकुर मित्तल
इन उपलब्धियों के सहारे ही पिछले साल अंकुर मित्तल दुनिया का नंबर वन शूटर बना था। इसके बाद भी प्रदेश सरकार से अंकुर को मायूसी ही मिल रही है, क्योंकि 2014 से 2017 तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जितने मेडल उसने जीते है। उनके आधार पर अंकुर को लगभग 45 लाख रुपये इनामी राशि मिलनी चाहिए थी। इसके लिए वह आवेदन भी कर चुका है, लेकिन उसे यह इनामी राशि नहीं दी जा रही है।
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अंकुर मित्तल
इस तरह मिलनी चाहिए इनामी राशि
अंकुर ने पिछले चार साल में एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, वल्र्ड चैंपियनशिप, वल्र्ड कप में कई बार हिस्सा लिया है तो उनमें मेडल भी जीते हैं। इनमें से उसे हर साल केवल एक इवेंट पर इनाम मिल सकता है। जिसके लिए अंकुर ने आवेदन भी किया हुआ है, लेकिन उसके बावजूद सरकार से इनामी राशि नहीं मिल रही। है। अंकुर के पिता अशोक मित्तल कहते है कि जिस तरह से सरकार उनके बेटे को इनामी राशि नहीं मिल रही है, उससे लगने लगा है कि सरकार केवल नीति बनाकर खिलाड़ियों को भूल जाती है।
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