जनरल डायर को मारने वाले शहीद उधम सिंह के लिए यहां आज भी हर रात बिस्तर लगता है। हर रात खिड़की खोलकर दरवाजा बंद कर दिया जाता है, यकीं न हो तो देखिए...
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 7
यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
31 जुलाई 1940 को ऊधम सिंह देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए, लेकिन अमृतसर के सेंट्रल खालसा यतीम खाना में ऊधम सिंह के लिए आज भी रोजाना रात को बिस्तर बिछाया जाता है।
विज्ञापन
3 of 7
यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
यहां नियमित कमरे की सफाई की जाती है। रात को खिड़की खोलकर दरवाजा बंद कर दिया जाता है। यतीम खाना में आज भी ऊधम सिंह की मौजूदगी मानी जाती है। शहीद ऊधम सिंह के नाम से खोले गए स्कूल में कुल 310 बच्चे पढ़ते हैं।
4 of 7
यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
23 दृष्टिहीन बच्चे ब्रेललिपि से पढ़ाई कर रहे हैं। ऊधम सिंह के बर्तन आज भी उनके कमरे में सुरक्षित हैं। इनमें दो कटोरी, एक थाली, दो डोल (हैंडल वाला डिब्बा), एक छन्ना और एक लोटा है। पहले छत कच्ची थी, लेकिन अब इसे पक्का कर दिया गया है।
विज्ञापन
5 of 7
यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
ऊधम सिंह को जब सेंट्रल यतीम खाना में दाखिला दिया गया था, तब के प्रमाण पत्र में उनका नाम शेर सिंह लिखा हुआ था। शेर सिंह के साथ उसके भाई का नाम साधु सिंह लिखा था। दोनों के प्रमाण पत्र के साथ-साथ ऊधम सिंह से जुड़े कई दस्तावेज लकड़ी के फ्रेम में शीशे में चमक रहे हैं।
विज्ञापन
6 of 7
यहां हर रात ऊधम सिंह के लिए लगता है बिस्तर
सेंट्रल खालसा यतीम खाना के सरदार गुरचरण सिंह और जगजीत सिंह बताते हैं कि यतीम खाना में ऊधम सिंह की गाथाएं पढ़ाई जाती हैं। जन्म दिन धूमधाम से मनाया जाता है। श्रद्धांजलि समारोह स्टाफ बच्चों के साथ मिलकर मनाते हैं।
रफी के मंच पर ऊधम सिंह को भुला दिया
31 जुलाई को मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि के एक दिन पहले ही अमृतसर में मोहम्मद रफी को श्रद्धांजलि देने के लिए आर्ट गैलरी और विरसा विहार में सैकड़ों कलाप्रेमी जुटे। शहर के गणमान्य लोगों के बीच मोहम्मद रफी को श्रद्धांजलि दी गई वहीं ऊधम सिंह को भुला दिया गया। विरसा विहार सोसाइटी और आर्ट गैलरी के संयुक्त रफी श्रद्धांजलि आयोजन के बावजूद ऊधम सिंह को बिसरा दिया गया। दोनों समारोह में विधायक, कई प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ शहर की बड़ी हस्तियां मौजूद थीं।