नेपाल भूकंप के दौरान माउंट एवरेस्ट पर आए एवलांच के बाद तबाही का मंजर देखकर लौटी हरियाणा की दो बेटियों ने आंखों-देखी सुनाई तो सब दंग रह गए। तस्वीरों में पूरा मामला।
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इन दो बेटियों ने देखा एवरेस्ट पर 'तबाही का खौफनाक मंजर'
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माउंट एवरेस्ट फतेह करने का सपना बीच मे छोड़कर लौटी अनीता कुंडू कहती हैं कि मेरे हौसले बुलंद थे। मगर प्रकृति के आगे किसी का जोर नहीं चलता। इस बार सफल नहीं हो सकी। अब अगले वर्ष फिर कोशिश करूंगी। फिलहाल तो कर्ज चुकाना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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इन दो बेटियों ने देखा एवरेस्ट पर 'तबाही का खौफनाक मंजर'
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अनीता कुंडू के मुताबिक अगर मैं इस अभियान में सफल हो जाती, तो सभी मुझे बधाई देने आते और मेरी सफलता को भुनाने की कोशिश करते। मगर अब मैं असफल हुई हूं, तो शायद अब कोई मेरा दुख बांटने नहीं आएगा। अनीता कुंडू का कहना है कि मुझे कर्ज लेकर इस अभियान पर जाना पड़ा। उधर, सरकार भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान जोर-शोर से चला रही है। मगर जब प्रदेश की ही एक बेटी ने सरकार ने मदद मांगी, तो सरकार ने हाथ खड़े कर लिए।
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अनीता कुंडू के मुताबिक मैं 6400 मीटर (22 हजार फीट) तक पहुंच गई थी। वे लक्ष्य से सिर्फ 2448 मीटर दूर थी, लेकिन विनाशकारी भूकंप के चलते मजबूरीवश कुंडू को वापस लौटना पड़ा। चीनी सरकार ने वहां सभी अभियानों को तुरंत बंद कर दिया। हालांकि सरकार का यह फैसला काफी हद तक सही भी था। क्योंकि हमारे साथ जो नेपाली शेरपा (गाइड) थे, भूकंप में उनके घर ध्वस्त हो चुके थे और वो एवरेस्ट पर चढ़ने की स्थिति में भी नहीं थे।
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अभियान के बारे में अनीता कुंडू ने बताया कि जब भूकंप आया, तो मैं साढ़े 20 हजार फीट की ऊंचाई पर थी। जैसे ही भूकंप आया, तो मेरे से 10 कदम दूर भूस्खलन हुआ। एक पहाड़ फट गया। वह ऐसा नजारा था, यदि कोई कमजोर दिल का व्यक्ति होता, तो उस नजारे को देखकर ही मर जाता। मैंने खुद ऐसा नजारा पहली बाद देखा था। मुझे खुद समझ में नहीं आया था, कि अचानक यह क्या हुआ। जान बचाने के लिए भागना पड़ा।
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दूसरी ओर पर्वतारोही सीमा गोस्वामी कहती हैं कि हम 17 हजार 500 फुट की ऊंचाई पर पहुंच चुके थे। छह दिन ओर सब कुछ ठीक रहता तो एवरेस्ट फतेह कर लेते। अपने घर लौटी सीमा ने ‘अमर उजाला’ ऑफिस पहुंचकर अपने अनुभव सांझा किए। सीमा ने कहा कि वह दोबारा प्रयास करेंगी। सीमा ने अपना संकल्प दोहराया और कहा कि ‘अब नहीं तो फिर सही’। मंजिल हासिल करके रहेंगी।
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सीमा बताती हैं कि 25 अप्रैल को हम सभी प्रैक्टिस के बाद अपने टेंट में लौटे ही थे कि अचानक सब कुछ हिलने लगा। पहले तो कुछ सामान्य सा दिखा। लेकिन जब पेंडुलम की तरह से ग्लेशियर हिलने लगा तो पता चला कि भूकंप आ गया। भूकंप 11 बजकर 50 मिनट पर आया था। 12 बजे तक सब कुछ तबाह हो गया। जोर लगाकर टेंट उठाया तो बाहर निकले। बाहर निकले तो देखा कि सब कुछ सफेद हो चुका था। वहां 800 से ज्यादा लोग थे। मेरी आंखों के सामने 50 से ज्यादा लोगों ने दम तोड़ा।