अब उन की ख्वाब-गाहों में कोई आवाज मत करना, बहुत थक-हार कर फुटपाथ पर मजदूर सोए हैं। पंजाब से अंबाला पहुंच रहे प्रवासी मजदूरों पर यह लाइन एकदम फिट बैठ रही है। सिर पर गठरी, गोद में मासूम। 300 किलोमीटर का सफर नंगे पांव तय कर चुके हैं और अभी 1 हजार किलोमीटर और चलना है। पांव के छाले और पेट की भूख सब कुछ भुलाकर घर पहुंचने की चिंता। न मौत का डर न पुलिस के लठ की फिक्र क्योंकि अब खोने को कुछ बचा ही नहीं । देखिए पलायन की ये तस्वीरें...