प्रो. कृष्ण कुमार।
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भारत में यह रिसर्च अधिक कामयाब
वैज्ञानिकों का कहना है कि विदेशों में लोग जूते अधिक पहनते हैं लेकिन भारत में चप्पल का प्रयोग अधिक होता है। ऐसे में पदचिह्नों वाला यह रिसर्च देश में अधिक कारगर होगा। यानी अपराधी की पहचान करने में आसानी होगी। जरूरी नहीं कि घटना स्थल पर फिंगरप्रिंट ही मिलें। अपराधी को पदचिह्नों के जरिए पहचाना जा सकेगा। भारत में पदचिह्नों पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों की भारी कमी है। दो से चार ही वैज्ञानिक हैं जो इस पर काम कर रहे हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के इस शोध को अमेरिका ने सराहा है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने जो शोध सेंसर तकनीक के जरिए किए हैं, यहां के वैज्ञानिकों ने इंकपेपर के जरिए किए हैं।
पदचिह्न विज्ञान ने तरक्की की है। नया रिसर्च सामने आया है जो अपराधियों को पकड़ने में सहायक होगा। बीएमआई के जरिए हम बता देंगे कि अपराधी कैसा है और पुलिस उसी दिशा में जांच करके अपराधी तक पहुंच सकेगी। -डॉ. केवल कृष्ण, एंथ्रोपोलॉजी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़