हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलाते हैं, जो विदेश गए भारतीय युवकों को फांसी के फंदे से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। फिर 10 युवकों की जिंदगी दांव पर है।
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सरबत दा भला ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी ओबेरॉय
ये हैं दुबई के एक बिजनेसमैन और सरबत दा भला ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी सिंह ओबराय। यही वो शख्स हैं जो सजा-ए-मौत पा चुके भारतीय लोगों को बचाने के लिए अरब देशों में कैंपेन चलाते हैं। वह अब तक पंजाब और हरियाणा के 17 युवाओं को ऐसे केसों से बचा भी चुके हैं।
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सरबत दा भला ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी ओबेरॉय
18 मार्च 2010 को शाहजाह में पंजाब और हरियाणा के 17 युवकों को एक पाकिस्तानी नागरिक मिश्री खान की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस केस में 27 जुलाई 2011 को एस सिंह ओबराय ने पीड़ित परिवार को पाकिस्तानी आठ करोड़ रुपये ब्लड मनी के तौर पर दिए थे। इसके बाद 12 सितंबर 2011 को कोर्ट ने यह समझौता स्वीकार किया और युवकों को दो साल कैद सुनाई लेकिन वे सब तीन साल पहले ही जेल में बिता चुके थे। इसलिए इन्हें रिहा कर दिया गया।
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सरबत दा भला ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी ओबेरॉय
ओबराय का कहना है कि 11 युवाओं के परिजन उनको कुछ दिन पहले पटियाला में मिले थे। पंजाबी युवाओं को बचाने के लिए पाक परिवार से बातचीत कर ब्लड मनी के लिए ऑफर किया जाएगा। ओबराय ने कहा कि वह दो दिन में आबू धाबी पहुंचकर जेल में युवाओं से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा शारजाह में भी कुछ माह पहले 11 पंजाबी युवाओं ने शराब के वर्चस्व की लड़ाई में दो पंजाबियों को मौत के घाट उतार दिया था। इस केस में भी अगली सुनवाई 14 दिसंबर को है।
इन्हें मिली है सजा: यूएई के इस केस में नवांशहर के हरप्रीत सिंह और अजय कुमार, बरनाला के सतमिंदर सिंह, होशियारपुर से चंद्रशेखर, मोगा से हरजिंदर, लुधियाना के कुलविंदर सिंह और धर्मवीर सिंह, अमृतसर के तरसेम सिंह, पटियाला के गुरप्रीत सिंह, गुरदासपुर के जगजीत और बटाला के टोनी को सजा सुनाई गई है। सभी युवक गरीब परिवारों से हैं और वहां पलंबर, मिस्त्री और इलेक्ट्रीशियन का काम करते हैं।