50 साथियों की जान बचाने वाले बीएसएफ के शहीद जवान रॉकी का शव जब देर रात पहुंचा तो उनके दर्शनों के लिए उमड़े लोग। देखिए तस्वीरें।
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देखिए, आतंकी हमले में शहीद बहादुर रॉकी की अंतिम विदाई
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बीएसएफ के वाहन में हरियाणा की माटी के लाल शहीद रॉकी के पार्थिव शरीर को वीरवार को जम्मू से यमुनानगर के लिए रवाना किया गया। बीएसएफ के मुताबिक बीएसएफ के आईजी ने शव को कंधा देकर वाहन तक पहुंचाया।
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सुबह करीब पौने दस बजे वाहन यमुनानगर के लिए रवाना हुआ। रात करीब पौने दस बजे बीएसएफ का वाहन नारायणगढ़ से होते हुए साढौरा पहुंचा। यहां शव को रेस्ट हाउस में रखा जाना था।
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जैसे ही साढौरावासियों को पता लगा कि शहीद के पार्थिव शरीर को रेस्ट हाउस में रखा जाएगा। शहीद के दर्शन के लिए यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। शहीद रॉकी के पिता शीशपाल और अन्य लोग भी यहां पहुंचे।
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मौके पर प्रशासन की ओर से एसडीएम पूजा चावरिया और डीएसपी बिलासपुर मौजूद थे। शहीद के पार्थिव शरीर के साथ बीएसएफ के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर हरिदत्त शर्मा साथ आए थे।
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रेस्ट हाउस में पार्थिव शरीर को रखने के लिए फ्रिजर न होने पर शहीद के शव को यमुनानगर सिविल अस्पताल ले जाया गया। यमुनानगर के सिविल अस्पताल में रखा गया है, जिसे शुक्रवार को परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा।
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हरियाणवी माटी के लाल शहीद जांबाज रॉकी बिलासपुर खंड के गांव रामगढ़ माजरा का रहने वाला था। उसके पिता शीशपाल छोटे किसान हैं। रॉकी की शहादत की सूचना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पूर्व सरपंच जयकुमार ने कहा कि रॉकी की शहादत से पूरा गांव स्तब्ध है। रॉकी ने अपनी शहादत देकर हमारे गांव का नाम रोशन कर दिया है।
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रॉकी का एक बड़ा भाई और रॉकी से छोटी बहन है। रॉकी वर्ष 2012 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। उसकी उम्र करीब 25 वर्ष थी। रॉकी के शहीद होने की खबर का पता चलते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां अंग्रेजी देवी गुमसुम सी हो गईं।
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गांव वालों को जब पता चला कि रॉकी ने एक आतंकवादी को मारकर अपने साथियों की जान बचाई तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। पूर्व सरपंच जयकुमार ने कहा कि रॉकी ने अपनी शहादत देकर हमारे गांव का नाम रोशन कर दिया है। गांव के लोग देर रात तक शीशपाल के घर पर मौजूद रहे। हर किसी की जुबान पर रॉकी की बहादुरी के चर्चे थे।