फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये थी 'रॉक लेजेंड' नेकचंद की आखिरी ख्वाहिश, जानिए कैसे पूरी की गई?

Mon, 12 Jun 2017 03:19 PM IST
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
विज्ञापन
1 of 6
नेकचंद एक्सीलेंस अवार्ड - फोटो : फाइल फोटो
दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक रॉक गार्डन के निर्माता नेकचंद की पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको बता रहे हैं, उनकी आखिरी ख्वाहिश।
विज्ञापन

2 of 6
'रॉक लेजेंड' नेकचंद
दुनिया भर के लोग पद्मश्री स्वर्गीय नेकचंद की बनाई खूबसूरत दुनिया को देखने की चाहत रखते हैं, लेकिन नेकचंद की चाहत लद्दाख जाने की थी। हालांकि जीते जी वे इस चाहत को पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उनका परिवार नेकचंद की इस आखिरी चाहत को पूरी करना चाहता था और ऐसा किया भी गया।
विज्ञापन

3 of 6
'रॉक लेजेंड' नेकचंद
इस के तहत नेकचंद की अस्थियों को रॉक गार्डन में स्थित लद्दाख के अक्स रूपी आइलैंड में रखा गया है। रॉक गार्डन में नेकचंद के ऑफिस एरिया में उनकी कमी महसूस न हो, इसके लिए उनका मोम का पुतला बनाया गया। इस पुतले को उनके चित्र के रूप में ऑफिस में रखा गया। इसका उद्धघाटन 12 जून 2015 को किया गया था। अब उनकी इच्छाओं को समर्पित एक मैमोरियल भी बनाया जा चुका है।

4 of 6
पद्मश्री नेकचंद की पुण्यतिथि - फोटो : amar ujala
ऑफिस एरिया के बीचों-बीच एक आइलैंड बनाया गया था, अब वही आइलैंड उनका नया घर बन चुका है। अनुज बताते हैं कि नेकचंद हमेशा से लद्दाख घूमने जाना चाहते थे। जब उन्हें आर्मी की तरफ से लद्दाख आने का न्यौता भेजा गया तो उनकी ये इच्छा प्रबल हो गई, लेकिन लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी और उनकी दिल की बीमारी के कारण डॉक्टर्स ने उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं दी।

 
विज्ञापन

5 of 6
रॉक गार्डन चंडीगढ़ के निर्माता नेकचंद - फोटो : फाइल फोटो
इस वजह से उनकी लद्दाख जाने की इच्छा अधूरी ही रह गई और 12 जून, 2015 को 90 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया। इस वजह से नेकचंद के ऑफिस एरिया को लद्दाख की शक्ल दी गई और उनका स्टेच्यू वहां स्थापित किया गया। वहां पर उनकी अस्थियां भी रखी हुई हैं। अनुज बताते हैं कि बाबू जी ने जीते जी ही अपनी पूरी जिंदगी रॉक गार्डन को ही समर्पित कर दी थी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
रॉक गार्डन चंडीगढ़ के निर्माता नेकचंद - फोटो : फाइल फोटो
अनुज कहते हैं कि अगर ये कहा जाए की रॉक गार्डन ही उनकी जिंदगी थी तो गलत न होगा। उनके दुनिया से चले जाने के बाद भी मैं उन्हें इससे जोड़े रखना चाहता था, यही वजह थी कि अंतिम संस्कार के बाद बिना किसी को बताए मैंने उनकी कुछ अस्थियों को अपने पास रखा था। वहीं अब उन्हें असली जगह पर पहुंचा भी दिया गया है। उम्मीद है कि ये सब देखकर वे खुश हो रहे होंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें