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रिसर्च: 500-1000 रुपये के नोटों की ये काली सच्चाई नहीं जानते होंगे आप

Tue, 15 Nov 2016 11:18 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नोट की सच्चाई
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक में चल रहे करंसी शोध में सामने आया है कि नोट में मौजूद बैक्टीरिया अच्छे-भले आदमी को बीमार करने के लिए काफी हैं। 
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note - फोटो : अमर उजाला
एक नोट में 26 हजार बैक्टीरियाः क्यों सुनकर चौंक गए ना। हमारे देश के एक नोट में 26 हजार से ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। जो किसी को भी बीमार बना सकता है। इसलिए संभल जाइये और अपने आपको नोटों से बचाइये।
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुराग खटकड़ ने बताया कि इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी मंत्रालय को रिसर्च करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। मंत्रालय ने प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान करते हुए 23.69 लाख रुपए का बजट भी स्वीकृत किया है।

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न जारी करें एक रुपये का नोट: प्रोफेसर डॉ. अनुराग ने भारत सरकार से गुजारिश की है कि एक रुपए का नोट न जारी करें। इस संदर्भ में उन्होंने 50 पेज की एक रिपोर्ट भेजी है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री,  वित्तमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, केंद्र व राज्य सरकार को भेजी गई है।
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ऐसे जमा होते हैं बैक्टीरिया: आपको बता दें कि कागज के नोट कॉटन लिंटर से तैयार किए जाते हैं। नोट की सतह खुरदरी होने के कारण उसमें धूल और नमी के कण जमा हो जाते हैं। जब हम लोग नोट को छूते हैं तो वे बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
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