नाटक देखने के लिए कुर्सियां कम पड़ीं थी तो शशि कपूर नीचे बैठ गए थे, लोगों ने उन्हे रोका तो कही थी ये बड़ी बात।
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shashi kapoor
70-80 दशक के बेहतरीन अभिनेताओं में शुमार शशि कपूर का चंडीगढ़ के कलाकारों के साथ गहरा लगाव था। करीब 20 साल पहले शशि कपूर चंडीगढ़ में पृथ्वी थिएटर फार परफार्मिंग आर्ट की ओर से टैगोर थिएटर में आयोजित नाटक कंजूस देखने आए थे।
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शशि कपूर
- फोटो : SELF
नाटक में कलाकारों का मेकअप नेशनल अवार्ड विजेता परवेश सेठी ने किया था। सेठी ने बताया कि नाटक के बाद स्वराज ट्रैक्टर्स में तैनात अधिकारी व पृथ्वी थिएटर फार परफार्मिंग आर्ट के संस्थापक चंद्रमोहन की पत्नी ने सेक्टर 16 स्थित अपने निवास पर एक रात्रि भोज का आयोजन किया। इसमें शशिकपूर सहित वरिष्ठ आईएएस को निमंत्रण भेजा गया था।
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शशि कपूर
उस समय शशि कपूर का काफी क्रेज था। इस वजह से रात्रि भोज में लोग काफी संख्या में पहुंचे, जिससे कुर्सियां कम पड़ गईं। उस दौरान रात्रिभोज में मौजूद कई कलाकार, जिसमें खुद परवेश सेठी भी शामिल थे, दरी बिछाकर बैठ गए।
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परवीन बॉबी के साथ शशि कपूर
यह सीन देखकर शशिकपूर कुर्सी छोड़कर कलाकारों के साथ नीचे दरी में बैठ गए। कलाकारों ने जब उन्हें नीचे बैठने से मना किया तो शशि कपूर ने कहा कि वे एक कलाकार हैं और कलाकारों को कैसे सम्मान दिया जाता है, ये सब उन्हें सिखाया गया है। वे नीचे नहीं बैठ रहे बल्कि कलाकारों का सम्मान कर रहे हैं। उनके इन शब्दों से वहां मौजूद कलाकारों को काफी हौसला मिला और उनके ये शब्द कलाकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए।
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शशि कपूर
टैगोर थिएटर के फाउंडर मेंबर थे शशि कपूर
हरियाणा कला परिषद के वाइस चेयरमैन सुदेश शर्मा ने बताया कि तत्कालीन चंडीगढ़ के कमिश्नर एमएस रंधावा ने कपूर फैमिली को सम्मान देने और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शशि कपूर और उनके पिता पृथ्वी राज कपूर को टैगोर के फाउंडर सदस्यों में शामिल किया गया।
यही नहीं शशि कपूर दो बार पंजाब यूनिवर्सिटी के इंडियन थिएटर के कार्यक्रम 1970 और 1975 में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कलाकारों को कई टिप्स दिए थे। शशि कपूर के निधन पर क्रिकेटर युवराज सिंह ने भी शशि कपूर को श्रद्धांजलि दी।