पंजाब के नाभा के जेल से भागे कैदियों के लिए जियो का सिम बेहद मददगार साबित हुआ। जानिए कैसे?
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नाभा जेल पटियाला
पंजाब की जेलों में लगे जैमरों में इतनी ताकत नहीं है कि वे 4जी तरंगों को भी रोक पाएं। उस पर हालात यह हैं कि बीते दो माह से बाजार में आए मुफ्त के 4जी सिम कार्ड से कैदियों की तो जैसे लाटरी ही लग गई। वे चोरी-छिपे जेलों में पहुंचे स्मार्टफोन्स पर 4जी सिम के जरिए इंटरनेट का उपयोग करने लगे हैं।
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नाभा जेल ब्रेक
नाभा जेल ब्रेक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि जेल से भागे आतंकी और गैंगस्टर काफी समय से 4जी सिम के जरिए इंटरनेट का उपयोग कर रहे थे और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के सहारे जेल के बाहर संपर्क बनाए हुए थे।
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नाभा जेल ब्रेक
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि, पंजाब की सभी जेलों में मोबाइल तरंगों को रोकने के लिए जैमर लगाए गए हैं, लेकिन 4जी की रफ्तार से आने वाली तरंगों को रोकने में यह सक्षम नहीं है। इस संबंध में बीएसएनएल के अधिकारियों ने बताया कि जैमर लगाने वाली कंपनियां ही जैमर की फ्रीक्वेंसी तय करती हैं, जिसके बाद जैमर 2जी और 3जी स्पीड की तरंगों को रोकते हैं।
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नाभा जेल ब्रेक
- फोटो : अमर उजाला
बीएसएनएल के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सरकारी जैमर भी 3जी फ्रीक्वेंसी पर ही कारगर हैं और चूंकि 4जी फ्रीक्वेंसी हाल ही आई है, इसलिए पुराने जैमर इस रफ्तार की फ्रीक्वेंसी को नहीं रोक सकते।
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नाभा जेल पटियाला
सूत्रों के अनुसार, नाभा जेल ब्रेक मामले में गठित एसआईटी को आरंभिक जांच में यह पता चला है कि जेल ब्रेक की साजिश रचते कैदियों ने इंटरनेट के जरिए जेल से बाहर पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी, जिसमें जेल पर हमले की रूपरेखा भी तैयार की गई थी।
हरमिंदर सिंह मिंटू को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया
- फोटो : ani
लेकिन फरार हुए कैदियों की ओर से अपनाई गई इस तकनीक ने एसआईटी को जेल के बाहर उन लोगों तक पहुंचने का रास्ता सुझाया है, जिनसे कैदी लगातार संपर्क बनाए हुए थे। सूत्रों का कहना है कि नाभा जेल ब्रेक मामले में जल्दी ही कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।