पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले को आज एक साल हो गया। इस मौके पर आपको सुनाते हैं एक ऐसे वीर सपूत की बहादुरी कहानी, जिसे सुनकर गर्व होगा।
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शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
- फोटो : फाइल फोटो
बात 2-3 जनवरी 2016 की रात की है, जब पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों ने कब्जा कर लिया था। करीब 80 घंटे चले मुकाबले और सर्च ऑपरेशन में अंबाला के गुरसेवक सिंह समेत 7 जवान शहीद हो गए थे। उनसे डेढ़ माह पहले ही ब्याहकर आई जसप्रीत के हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी थी कि आतंकी हमले में कमांडो पति शहीद हो गया। नियति ने ऐसा खेल खेला कि पति के शव पर चूड़े को उतारना पड़ रहा था।
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शहीद कमांडो गुरसेवक सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया
- फोटो : अमर उजाला
पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले में पहली बार गरूड़ फोर्स का कोई कमांडो शहीद हुआ था। 5 गोलियां लगने के बावजूद डटा रहा और करीब एक घंटे तक दुश्मनों पर भिड़ता रहा। अमूमन सेना के पैरा कमांडो, नेवी के मरीन कमांडो व एनएसजी के कमांडो ही आतंकियों से भिड़ते हैं, लेकिन बरसों बाद ऐसा हुआ है कि आतंकियों ने एयरबेस को निशाना बनाया है, इसलिए उनसे लड़ने के गरूड़ कमाडों स्पेशल ऑपरेशन पर तैनात किए गए।
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शहीद कमांडो गुरसेवक सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया
- फोटो : अमर उजाला
1 जनवरी को अंबाला जिले के गरनाला गांव के रहने वाले गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह को हरियाणा के आदमपुर से पठानकोट भेज दिया गया। रात में डेढ़ महीना पहले ब्याही पत्नी जसप्रीत कौर से बात कर रहे गुरसेवक सिंह ने यह कहकर फोन काट दिया, बाद में फोन करूंगा और अगर फोन नहीं आया तो सो जाना। इसके बाद फोन नहीं आया, क्योंकि उसी रात को ही गुरसेवक सिंह देशसेवा के लिए न्यौछावर हो चुका थे।
शहीद गुरसेवक सिंह के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा
- फोटो : फाइल फोटो
पता भी तब चला, जसप्रीत कौर ने अपना फेसबुक अकाउंट खोला और गुरसेवक के एक दोस्त की पोस्ट मिली। हाल ही में 15 अगस्त को वीर शहीद को शौर्य चक्र से नवाजा गया, वहीं इससे ठीक दो दिन पहले यानि 13 अगस्त को गुरसेवक सिंह की पत्नी जसप्रीत कौर ने एक बेटी को जन्म दिया।