सुबह होने तक दुश्मन के 38 पैटन टैंक और कई बख्तरबंद गाड़ियों को ध्वस्त कर दिया। इस तरह एक छोटी सी सैन्य टुकड़ी ने भारत-पाक युद्ध की जीत की नींव रखी। 1971 का युद्ध जीतने की खुशी में पाक सेना के काबू किए टैंक पर मेजर कुलदीप चांदपुरी अपने साथियों सहित चढ़कर नाचे और वही तस्वीर एक यादगार बन गई।
आज 48 वर्षों बाद उस टैंक पर मेजर चांदपुरी के साथ नाचने वाले 23 पंजाब रेजीमेंट के पूर्व सैनिक नायक उज्जवल सिंह, हवलदार गुरमीत सिंह, नायक मलूक सिंह, नायक मेजर सिंह लौंगेवाला युद्ध स्मरण समारोह में झूमकर नाचे तथा वर्षों बाद मिले अपने साथियों के साथ युद्ध के अनुभव साझे किए। सभी पूर्व सैनिकों ने भारत माता की जय, देश के शहीद अमर रहे का जयघोष करते हुए धरती मां को नमन किया।
23 पंजाब रेजीमेंट पर बनी है बार्डर फिल्म: कुंवर विक्की
शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा के सचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि पूरा देश दिसंबर में भारत-पाक युद्ध की जीत का जश्न विजय दिवस के रूप में मनाता है। उस युद्ध में 23 पंजाब रेजीमेंट के 120 जवानों ने 2 हजार पाक सैनिकों को धूल चटाते हुए बहादुरी का जो इतिहास रचा था, उसकी मिसाल कहीं नहीं मिलती।
इस यूनिट के शौर्य को लेकर 1997 में फिल्म निर्देशक जेपी दत्ता ने बार्डर फिल्म बनाई थी। जिसमें मेजर कुलदीप चांदपुरी का रोल अभिनेता व सांसद सनी देओल ने निभाया था। आज भी देश 23 पंजाब रेजीमेंट के उन जांबाजों की शूरवीरता को याद करता है। समारोह में मुख्यातिथि मेजर जनरल राजीव नंदा व बिग्रेडियर एके खोसला ने 23 पंजाब रेजीमेंट के शौर्य चक्र विजेता शहीद लेफ्टीनेंट गुरदीप सलारिया की माता तृप्ता सलारिया व पिता रिटा. कर्नल सागर सिंह सलारिया को दोशाला ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट करके सम्मानित किया। इस दौरान रिटायर्ड बिग्रेडियर एके खोसला, कर्नल हरचरण सिंह, कर्नल राजेश दत्ता, मेजर आरके शर्मा, कैप्टन जेएस गुलिया, सूबेदार चमकौर सिंह शेरगिल, कैप्टन ब्रह्मजीत सिंह ने विशेष मेहमान के तौर पर शिरकत की।