फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हादसे की 10 दर्दनाक कहानियां: उजड़े कई परिवार, बुझ गए इकलौते चिराग, गांवों में नहीं जले चूल्हे

Thu, 26 Sep 2019 12:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद (हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 11
जींद में दर्दनाक हादसा - फोटो : अमर उजाला
सड़क हादसे में मारे गए सभी नौ युवकों ने अपने-अपने घर फोन कर सेना की भर्ती के लिए फिजिकल सही तरीके से होने की सूचना दी थी। इस समाचार को पाकर सभी खुश थे। सभी परिवारों की आर्थिक स्थिति सामान्य है। किसी ने अपने बच्चों को मजदूरी करके पाला तो, किसी ने अपनी छोटी सी खेतीबाड़ी के सहारे। हादसे ने एक ही झटके ने सभी परिवारों को उजाड़ दिया। सभी परिवारों को यह लगा था कि उनका बेटा सेना में भर्ती हो जाएगा और उनके अच्छे दिन आएंगे, लेकिन किस्मत का यह मंजूर नहीं था।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 11
अमित पिल्लूखेड़ा और मंगल बुराडहर का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
1- मां को किया था फोन
गांव पिल्लूखेड़ा निवासी 20 वर्षीय अमित के पिता सरवर की दस महीने पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। उसका एक छोटा भाई सुमित भी है। दो एकड़ जमीन के मालिक अमित के पिता किसान थे। फिलहाल दोनों बच्चों को उनकी मां मुकेश पाल रही थी। मेहनत-मजदूरी करके अपने दोनों बेटों को 12वीं कक्षा तक पढ़ाया था। अमित आईटीआई भी कर रहा था। अमित ने रात आठ बजे अपनी मां को फोन करके सूचना दी थी कि उसका फिजिकल सही हो गया है। मेडिकल टेस्ट में भी वह पास हो जाएगा, इसलिए आज घर आएगा, क्योंकि सभी दोस्त घर आ रहे हैं। वह शुक्रवार को मेडिकल टेस्ट देने जाएगा, लेकिन रात 11 बजे आए फोन ने मां के सारे सपने को चकनाचूर कर दिया। 
विज्ञापन

3 of 11
सुमित धड़ौली और हाउसिंग बोर्ड निवासी प्रवीण का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
2- पिता को मिली थी मेडिकल फिटनेस की सूचना
पिल्लूखेड़ा निवासी राममेहर को रात में उसके 19 वर्षीय बेटे भारत ने बताया कि मेरा मेडिकल सही हो गया। अब मैं जल्द ही देश की सेवा में लग जाऊंगा। राममेहर को लगा कि जिस मेहनत व खेतीबाड़ी से उसने अपने बेटे को पढ़ाया है, उससे उसका सपना साकार हो जाएगा। राममेहर का एक छोटा बेटा है जो 10वीं कक्षा में पढ़ता है। रात को जब राममेहर के पास फोन आया कि उसके बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। यह सुनकर राममेहर कहने लगा कि ये धरती अभी फट जाए और उसमें समा जाऊं। राममेहर ने भारत के लिए सपना देखा था वह सब खत्म हो गया।

4 of 11
दीपक और संजय निवासी पाजूकलां का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
3- पिल्लूखेड़ा में जलीं एक साथ दो चिताएं
गांव पिल्लूखेड़ा निवासी भारत व अमित की मौत से पूरे गांव में मातम छा गया। भारत और अमित की एक साथ चिता जलाई गई। पूरा गांव शोक में डूब गया। हर किसी की जुबान पर केवल यही था कि हे भगवान, यह क्या किया।
विज्ञापन

5 of 11
भड़ताना निवासी संजय और बुराडहर निवासी रोबिन का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
4- उजड़ गई धड़ौली निवासी सुभाष की दुनिया
धड़ौली निवासी सुभाष मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उसके बड़े बेटे अमित की नौ माह पहले बीमारी से मौत हो गई थी। अब इस सड़क हादसे ने छोटे बेटे 21 वर्षीय सुमित की भी जान ले ली। बड़े बेटे अमित की मौत से सुभाष अभी तक उबर भी नहीं पाया था कि उसका दूसरा बेटा भी छिन गया। रह-रहकर सुभाष पुकार रहा था कि बेटा मेरे को भी ले चल। सुभाष की एक बेटी ममता है, जो शादीशुदा है। सुमित की रात को 8.20 बजे अपने चाचा चांद व चचेरे भाई सन्नी से बात की थी। सुमित ने कहा था कि वह साढ़े 10-11 बजे तक जींद पहुंच जाएगा। इसलिए आप बाइक लेकर उसे जींद लेने आ जाना, लेकिन जब दोनों जींद में सुमित का इंतजार कर रहे थे, तो उन्हें सड़क हादसे का फोन मिला। दो जवान बेटों को खोने वाले सुभाष का रो-रोकर बुरा हाल है। सुभाष के अनुसार बड़े बेटे की मौत के बाद ही वह इतना टूट गया था कि घर जाने से भी कतराता था, अब तो उसकी दुनिया ही उजड़ गई है।
विज्ञापन

6 of 11
सोमनाथ ऑटो चालक और भारत पिल्लूखेड़ा निवासी का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
5- मौत खींच ले गई प्रवीण को ऑटो तक
जींद की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी 50 वर्षीय प्रवीण मैकेनिक था और हांसी में मल्होत्रा सेल्स-परचेज दुकान पर बाइक सेल-परचेज का काम करता था। वह प्रतिदिन जींद से हांसी आता-जाता था। मंगलवार को भी प्रवीण सुबह हांसी गया था। रात को लगभग नौ बजे जब उसे जींद के लिए कोई वाहन नहीं मिला तो उसने एक ऑटो का रुकवाया और जींद चलने को कहा। इस ऑटो में अन्य युवक भी सवार थे। इसमें वह भी सवार हो गया। रात को ऑटो को टैंकर ने टक्कर मार दी। हादसे में प्रवीण की दर्दनाक मौत हो गई। प्रवीण के दो बच्चे हैं। प्रवीण मूलरूप से रोहतक का था और पिछले 12 वर्षों से जींद की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहता था।
विज्ञापन

7 of 11
घटनास्थल पर खड़ा टैंकर - फोटो : अमर उजाला
6- छोटे भाई का फिजिकल दिलाने गया था बड़ा भाई, दोनों की मौत
पाजू कलां निवासी 23 वर्षीय दीपक अपने छोटे भाई 21 वर्षीय संजय का फिजिकल दिलवाने के लिए हिसार गया था। पिता रणधीर ने सोचा था कि दीपक कई भर्तियों में जा चुका है, इसलिए संजय को कोई दिक्कत नहीं आने देगा। इसलिए रणधीर ने संजय के साथ दीपक को भी भेजा था। दीपक की हाट गांव निवासी रेखा के साथ छह महीने पहले ही शादी हुई थी। सड़क हादसे में दोनों भाइयों की मौत हो गई। एक भाई अजीत अभी 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। रणधीर मेहनत कर बच्चों का पेट पालता था। पाजू कलां में दो सगे भाइयों की मौत से पूरा गांव सदमे में है। दोनों का एक ही साथ संस्कार किया गया। रणधीर के अनुसार बेटे की नौकरी सेना में लगने से काफी उम्मीद थी, लेकिन भगवान ने उल्टा दुखों का पहाड़ उन पर तोड़ दिया।

8 of 11
मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
7- एक फोन ने लूट लिया सब कुछ
गांव भड़ताना निवासी सतीश के दोनों बेटे संजय व परमजीत सेना में भर्ती के लिए हिसार गए थे। मंगलवार शाम को लगभग छह बजे संजय ने अपने पिता सतीश को फोन करके बताया कि दोनों भाइयों का फिजिकल हो गया है। यह बात सुनकर सतीश खुश था। सतीश किसान हैं और खेतीबाड़ी करके दोनों बेटों को सेना के लिए कोचिंग दिलाई। सतीश की एक बेटी है जिसकी शादी हो चुकी है। सतीश को अपनी मेहनत सफल होती दिखाई दे रही थी मगर रात 11 बजे फोन आया तो उसने सोचा कि बेटे घर पहुंच गए, लेकिन यह फोन पुलिस स्टेशन से था। उसे जैसे ही सूचना मिली कि उसके बेटे संजय की मौत हो गई और परमजीत घायल है तो उसे लगा उसका सबकुछ उजड़ गया।

9 of 11
- फोटो : अमर उजाला
8- बुझ गया दलबीर के घर का इकलौता चिराग
गांव बुराडहैर निवासी दलबीर का 19 वर्षीय इकलौता बेटा रोबिन सड़क हादसे का शिकार हो गया। रोबिन 12वीं पास करके सेना में भर्ती होने के लिए कोचिंग ले रहा था। वह अपने दोस्तों के साथ हिसार में फिजिकल के लिए गया था। फिजिकल होने के बाद उसने अपने पिता दलबीर से सात बजे फोन करके कहा था कि उसका फिजिकल हो गया है। शुक्रवार को उसका मेडिकल होगा। इसलिए आज रात तक वह घर आ जाएगा। दलबीर ने रोबिन को मना भी किया कि बेटा रात को सफर ठीक नहीं रहता, लेकिन रोबिन ने कहा कि वह अकेला नहीं है। उसके साथ नौ अन्य दोस्त भी हैं। लेकिन दलबीर को क्या पता था कि रोबिन का शव उसके साथियों के साथ ही कफन में लिपटा मिलेगा। दलबीर खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का पेट पालता है। दलबीर की एक छोटी बेटी है, जो सातवीं कक्षा में पढ़ती है। 

10 of 11
नागरिक अस्पताल पहुंच मृतकों के परिजन - फोटो : अमर उजाला
9- रात को ज्यादा भाड़े के चक्कर में गई सोमनाथ की जान
हांसी निवासी देशराज ने अपने सबसे छोटे बेटे सोमी उर्फ सोमनाथ को ऑटो दिलाया हुआ था। सोमी ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। सोमी रात को ही ज्यादा ऑटो चलाता था, क्योंकि रात को किराया डबल लिया जाता है। जब सभी युवक हांसी पहुंचे तो उन्हें सोमी ऑटो लिए हुए दिखाई दिया। सभी युवकों ने सोमी को जींद चलने के लिए कहा। सोमी ने इन युवकों से एक हजार रुपये मांगे तो सभी युवक राजी हो गए। ऑटो में हांसी से सवार होकर जींद के लिए निकल पड़े। जब सोमी ऑटो लेकर रामराये गांव से कुछ आगे निकला तो सड़क हादसे में अन्य युवकों के साथ ही उसकी भी मौत हो गई।
विज्ञापन

11 of 11
jind Accident - फोटो : अमर उजाला
10- बुराहडैर के राजबीर का बुझ गया इकलौता चिराग
बुराडहैर निवासी राजबीर अपने 18 वर्षीय इकलौते बेटे मंगल को बड़े नाजों से पाला था। छोटा किसान होने के कारण राजबीर अपना पेट काटकर बेटे के लिए वह सबकुछ करता था जो वह कर सकता था। मंगल ने भी सोचा था कि वह फौज में भर्ती होकर पिता का बोझ कम करेगा। मंगल 12वीं कक्षा के बाद आईटीआई भी करता था।

इसके अलावा सेना में भर्ती के लिए उसने एक कोचिंग सेंटर में भी दाखिल लिया था। अपने जरूरतों को कम करके राजबीर ने अपने बेटे मंगल को कोचिंग सेंटर में दाखिला दिलाया था। साढ़े छह बजे उसने अपने पिता राजबीर को फोन करके कहा था कि उसने फिजिकल पास कर लिया है, अब मेडिकल होगा। इसमें भी वह पास हो जाएगा। मंगल की मौत के बाद राजबीर के घर का इकलौता चिराग बुझ गया। राजबीर का अस्पताल में रो-रोकर बुरा हाल था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें