राम रहीम ने नोटबंदी के दौरान लाखों का काला धन सफेद किया था। इसके लिए बाबा ने वो जुगाड़ लगाया कि आयकर विभाग भी चकरा गया।
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दरअसल, डेरा प्रमुख द्वारा बनाई गई फिल्मों में मनी लॉन्ड्रिंग से जुटाए पैसे लगाए जाते थे। इसके बाद फिल्म रिलीज होने पर खुद ही टिकट खरीद ली जाती थी और अपने समर्थकों को फिल्म दिखाई जाती थी। हाईकोर्ट ने इस मामले को देखते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के पक्ष की ईडी की बजाय सीबीआई के आर्थिक अपराध शाखा से जांच करवाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस बारे में अब केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
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राम रहीम
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हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जांच का स्टेटस पेश किया गया। इस दौरान ईडी सहित सभी एजेंसियों ने अपना जवाब सौंपा। हाईकोर्ट ने ईडी के जवाब से असंतुष्टि जताते हुए कहा कि कहा कि यह बेहतर होगा कि इस मामले में सीबीआई आर्थिक अपराध शाखा ही जांच करे।
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ram rahim singh
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कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
वहीं दूसरी ओर एमिकस क्यूरी अनुपम गुप्ता ने कोर्ट कमिश्नर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर ही सवाल उठा दिए। गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट में सिवाय दस्तावेजों के और कुछ भी नहीं है। जांच के दौरान कोर्ट कमिश्नर को जो मिला उन्ही दस्तावेजों को एकत्रित कर उन्होंने रिपोर्ट बनाकर हाईकोर्ट में सौंप दी।
जांच अधिकारी ने किसी भी किस्म की कोई टिप्पणी रिपोर्ट में नहीं की है और न ही सभी पहलुओं पर गौर कर मूल्यांकन किया। ऐसे में यह रिपोर्ट न होकर बस दस्तावेजों या कागजों का पुलिंदा है। इस पर हाई कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर से इस रिपोर्ट को दोबारा मूल्यांकन और टिप्पणी के साथ अगली सुनवाई पर पेश किए जाने के आदेश दे दिए हैं।