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राखी गढ़ीः खुदाई में मिली हैरतंगेज चीजें, मिट्टी बताएगी दीवार की उम्र

Mon, 18 Apr 2016 03:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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skelton - फोटो : skelton
हिसार जिले के राखी गढ़ी में खुदाई से मिली हैरतंगेज चीजों को देखकर पुरातत्वविद अब दीवार की उम्र जानना चाहते हैं। इसके लिए मिट्टी की जांच की जाएगी।
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राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान - फोटो : फाइल फोटो
राखी गढ़ी में पिछले दो सप्ताह से हरियाणा पुरातत्व विभाग, डेक्कन यूनिवर्सिटी पूना और कोरिया की सियोल यूनिवर्सिटी संयुक्त रूप से साइट दो और सात पर खुदाई का कार्य कर रहे हैं। इस बार हो रही खुदाई के दौरान मिट्टी के बने बर्तनों के टुकड़े मिले हैं, जिन पर चित्रकारी है। यह किसी खास प्रकार के पेंट की लगती है, जो कि आज तक भी दिखाई दे रही है। कहा जाए तो पांच हजार वर्ष पहले की गई चित्रकारी आजतक भी सुरक्षित है। 
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राखी गढ़ीः खुदाई में मिली हैरतंगेज चीजें, मिट्टी बताएगी दीवार की उम्र

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राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान - फोटो : फाइल फोटो
अब पुरातत्वविद इस दीवार की मिट्टी के सैंपल ले रहे हैं। सैंपल की जांच से यह राज खुलेगा कि यह दीवार कितने पुराने समय की हैं। गांव राखी गढ़ी में हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट है और इस साइट पर डेक्कन यूनिवर्सिटी पूना के छात्र पिछले काफी समय से खुदाई करने में लगे हुए हैं। पिछले साल हुई राखी गढ़ी में हड़प्पाकालीन सभ्यता के टीलों की खुदाई में मिले अवशेषों से प्रतीत होता है कि उस समय के लोग भी दूर-दराज क्षेत्रों में व्यापार करते थे। 

राखी गढ़ीः खुदाई में मिली हैरतंगेज चीजें, मिट्टी बताएगी दीवार की उम्र

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राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान - फोटो : फाइल फोटो
हालांकि वे किस चीज का व्यापार करते थे, अभी तक यह सामने नहीं आ सका है। खुदाई के दौरान एक मोहर और सील मिली थी, जिसके आधार पर पुरातत्व वेत्ता दावा कर रहे हैं कि हड़प्पाकाल में यहां के लोग दूसरे राज्यों में व्यापार करते थे।  पिछले साल खुदाई में जो सील व मोहर मिली थी उस पर शेर का निशान अंकित है। इनको लेकर डक्कन यूनिवर्सिटी के छात्र काफी उत्साहित हैं कि उस समय के लोग व्यापार भी करते थे। 
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राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान - फोटो : फाइल फोटो
पुरातत्व विशेषज्ञ मानते हैं कि उन लोगों का धंधा बर्तनों पर चित्रकारी करके दूसरे राज्यों और देशों में बेचना था। खुदाई के दौरान जो पत्थर मिले हैं, वो आजकल राजस्थान में पाए जाते हैं। इसके अलावा नीले मनके अफगानिस्तान में, लाल मनके गुजरात के समुद्री तट पर और चर्ट पत्थर पाकिस्तान में ही पाया जाता है। खुदाई के दौरान खाना खाने और बनाने के बर्तन के टुकड़े भी निकले हैं। इनमें मिट्टी की थाली, मिट्टी की कटोरी, थाल, प्लेट, परात, हांडी, घड़ा इत्यादि के टुकड़े पाए गए हैं। 
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राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान - फोटो : फाइल फोटो
इन सभी बर्तनों पर विशेष प्रकार की कलाकृतियां बनाकर इनको संवारने का काम भी किया गया है। उस समय के लोग ज्यादातर मिट्टी के बने बर्तनों का ही प्रयोग करते थे। शृंगार के लिए मिट्टी की चूड़ियां, मनके, लाल मनके, सफेद मनके, शंक की चूड़ियां, फियांश, सफेद मिट्टी के मनके इत्यादि को शृंगार के लिए प्रयोग किया जाता था। मिट्टी का रंग भी अलग अलग प्रकार पाया गया है। सभी सैंपलों को पूना की डेक्कन यूनिवर्सिटी में भेजा गया है। इनकी जांच से ही पता चलेगा कि यह सभ्यता कितनी पुरानी है। 
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राखी गढ़ी गांव में मिले हड़प्पा संस्कृति के निशान - फोटो : फाइल फोटो
हड़प्पा संस्कृति के गांव राखी गढ़ी में खुदाई के दौरान जो मकान पिछले साल निकले थे, उनका निर्माण कच्ची ईंटों से किया गया था। सभी ईंटों की लंबाई-चौड़ाई एक ही प्रकार की थी, जिसमें ईंट की मोटाई साढ़े सात सेंटीमीटर और चौड़ाई 15 सेंटीमीटर की है। उस समय के घरों की चारदीवारी की मोटाई 180 सेंटीमीटर, मकान के अंदर बने कमरों की दीवारों की मोटाई 90 सेंटीमीटर और छोटे कमरों की दीवार 45 सेंटीमीटर मोटी बनाई जाती थी। 
 
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