इस बार रक्षाबंधन के दिन ही चंद्रग्रहण लग रहा है, इसलिए राखी बांधने को बहुत कम समय मिलेगी। साथ ही जानिए चंद्रग्रहण के समय ऐसा क्या करें कि शुभ फल प्राप्त हो।
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- फोटो : अमर उजाला
सात अगस्त दिन सोमवार को रक्षाबंधन है। चंडीगढ़ में श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, इस बार करीब नौ साल के बाद रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण का योग बना है। पूर्णिमा तिथि, सोमवार एवं श्रावण नक्षत्र में चंद्रग्रहण लगेगा। ग्रहण की कुल अवधि 1 घंटा 41 मिनट होगी। इस साल खंड ग्रास चंद्र ग्रहण श्रवण नक्षत्र एवं मकर राशि पर लगेगा। ऐसा योग मकर राशि वालों के लिए कुछ नया लेकर आएगा।
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भारतीय समयानुसार ग्रहण का स्पर्श रात में 10 बजकर 50 मिनट पर होगा। ग्रहण मध्य रात्रि 11 बजकर 50 मिनट पर तथा मोक्ष रात्रि 12 बजकर 49 मिनट पर होगा। श्रावण पूर्णिमा को चंद्रग्रहण होने से श्रावण नक्षत्र एवं पूर्णिमा तिथि दोनों ही दूषित हैं। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा सोमवार 7 और 8 अगस्त को होने वाला चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा। यह ग्रहण सोमवार को हो रहा है। इसलिए इसे चूड़ामणि चंद्रग्रहण कहा जाएगा।
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बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार, ग्रहण का सूतक भारतीय समयानुसार दोपहर बाद एक बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ होगा। सुबह 11 बजे तक भद्रा होने से इससे पहले राखी नहीं पहनाई जा सकती। इसलिए बहनों के पास राखी पहनाने के लिए रक्षाबंधन के दिन सुबह 11 बजे से 1 बजकर 52 मिनट का ही समय है। माना जाता है कि सूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा में राखी बांधी थी। इन्हीं कारणों से रावण का विनाश हो गया था। तब से ही भद्रा में राखी नहीं बांधी जाती है।
पंडित जी ने बताया कि चंद्रग्रहण में स्नान, दान, जप, हवन, श्राद्ध का अत्यधिक महत्व है। चंद्रग्रहण मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन राशि वाले के लिए शुभ, वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, धनु, मकर और कुम्भ राशि वाले जातकों के लिए अशुभ होगा। श्रावण नक्षत्र में जन्मे जातकों के लिए ग्रहण अशुभ हो रहा है। उन्हें छाया दान कर अपने इष्ट का जाप करना चाहिए। ग्रहण के समय भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है।