हाथ में त्रिशूल लिए लाल रंग की ड्रेस में दिख रही ये महिला आत्माओं से बातें करती है। इसने खुद ये दावा किया है और अब ये अपने एक कारनामे से सुर्खियों में है।
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एक्टिंग डेब्यू के लिए तैयार है ‘राधे मां’
ये महिला कोई और नहीं, बल्कि अकसर विवादों में रहने वाली राधे मां है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो आया, जिसमें वे अपने मन की बात करती नजर आ रही हैं। इसमें उन्होंने खुद से जुड़े कई राज भी खोले। राधे में ने दावा किया कि उनकी जिंदगी में एक आत्मा थी, जिससे वह बात किया करती थीं। उन्होंने कहा है कि वह बचपन से ही काली मां से बहुत प्यार करती थीं और वह उन्हीं से बातें किया करती थीं।
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राधे मां पहुंची अमृतसर
- फोटो : अमर उजाला
राधे मां कहती हैं कि वह उनसे नाराज नहीं हैं, जिन्होंने उन्हें छोड़ा है। मैं काफी समय तक डिप्रेशन में रहीं। मुझे शॉक लगा था, लेकिन अब ठीक होती जा रही हूं। मैंने 1008 बाबा रामादीन दास महाराज को मत्था टेका और उन्होंने मेरा जीवन बदल दिया। अगर आज मैं जिंदा हूं तो भक्तों के प्रेम की वजह से जिंदा हूं। बहुत जल्द मेरे भक्त असली राधे मां से रूबरू होंगे।
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अमृतसर में राधे मां
दरअसल, खुद को देवी का रूप बताने वाली राधे मां अक्सर विवादों के चलते चर्चा में रहीं लेकिन अब वो फिल्मों में एंट्री करने जा रही हैं। खबर है कि वो जल्द ही एक वेब सीरीज के जरिए अपना एक्टिंग डेब्यू करेंगी। सूत्रों के मुताबिक, राधे मां 'नो कास्टिंग नो काउच ओनली आउच' नाम की वेब सीरीज के जरिए अपना एक्टिंग डेब्यू करेंगी। इसकी शूटिंग उन्हीं के पॉश बंगले में शुरू कर चुकी है।
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अमृतसर में राधे मां
बता दें कि इस वेब सीरीज में राधे मां खुद के ही किरदार में नजर आएंगी, जो लीड किरदार है। इस सीरीज के प्रोड्यूसर रमन हांडा के मुताबिक, इस सीरीज के जरिए वो लोगों को असली राधे मां से मिलाना चाहते हैं। उनके अनुसार राधे मां का मतलब है 'राह दे मां', हमें रास्ता दिखाओ, मां’। और यही वो इस वेब सीरिज में करेंगी, वो भगवान के एक दूत का रोल प्ले करेंगी, जो लोगों को डिप्रेशन से बाहर लाता है।
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हरिद्वार में राधे मां
- फोटो : amar ujala
राधे मां का वास्तविक नाम सुखविंदर कौर है। प्राप्त सूचना के अनुसार सुखविंदर कौर का जन्म 4 अप्रैल 1965 में पंजाब के जिले गुरुदासपुर के दोरंगला गांव में हुआ था। वह अपने गांव के काली देवी मंदिर में काफी दिन तक रही और वहां के लोगों को बचपन से कुछ चमत्कारिक चीजें दिखाया करती थी। हालांकि उसके गांव वालों ने उसके बारे में बचपन में किसी भी चमात्कारिक शक्ति होने से या दिखाने से इनकार किया।
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राधे मां
तरह-तरह के आरोपों और अपने पहरावों को लेकर सुर्खियों में छाई ‘राधे मां’ पंजाब के एक हलवाई के बेटे की बहू बनीं। उनकी शादी मोहन सिंह के साथ हुई थी, शादी के समय सुखविंदर की उर्म 17 साल थी। जब सुखविंदर की शादी हुई उस वक्त उसके ससुराल की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। सुखविंद जब 22 साल की हुई तब तक उसके छह बच्चे हो चुके थे।
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हरिद्वार में राधे मां
- फोटो : amar ujala
बताते हैं अपनी पति की आर्थिक सहायता के लिए वह कपड़ा सिलती थी लेकिन इसी दौरान उसका पति कमाने के लिए कतर की राजधानी दोहा चले गए। पति के कतर जाने के बाद सुखविंदर अध्यात्म की ओर मुड़ गई और महन्त रामदीन की शिष्या बन गई। महन्त रामदीन ने ही सुखविंदर को राधे नाम दिया। इसके बाद राधे संत समागमों में जाने लगी और लोगों से पहचान करने लगी।
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हरिद्वार में राधे मां
- फोटो : amar ujala
मुंबई में कुछ साल रहने के बाद राधे फिर अपने पंजाब जाने लगी जहां लोग पहले से ज्यादा संख्या में उसके शिष्य बनने लगे। इसी दौरान राधे अपने पति और दो बेटों को मुंबई ले गई और फिर पंजाब में बार आकर अपने शिष्यों से मिलने लगी। इसके बाद राधे मां को देखने के लिए जब काफी संख्या में लोग आने लगे तो मुंबई के गुप्ता परिवार प्रचार कर राधे दर्शन शुरू कराया और फिर चल पड़ा राधे मां का देवी बनकर लोगों को दर्शन देने का धंधा।
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Radhe maa
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब में मुकेरियां के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर खानपुर में राधे मां का आध्यात्मिक निवास मां भगवती मंदिर है। मंदिर में उनकी बहन अपने परिवार के साथ रहती हैं और मंदिर की देखरेख करती हैं। भक्तों के बीच सुखविंदर कौर के पति को पिता का दर्जा मिला हुआ है और उन्हें ‘डैडी जी’ कहा जाता है। राधे की बहन को भक्त ‘रज्जी मासी’ और उनके पति को ‘मासड़ जी’ कह कर संबोधित करते हैं।
हरियाणा के सोनीपत में चौंकी लगाती राधे मां
- फोटो : अमर उजाला
राधे मां की भाभी बलविंदर कौर की हत्या के मामले में उनके भाई और पिता को सजा भी हो चुकी है। बलविंदर कौर के भाई जगतार सिंह ने गांव नानोनंगल में पिछले साल आरोप लगाया था कि उनकी बहन की हत्या में राधे मां भी शामिल थी। राधे मां के दो भाई और पिता ने उनकी बहन की हत्या की थी, जिन्होंने 10-10 साल की सजा काटी। एक बार राधे मां ने अपनी भाभी बलविंदर को इतना धमकाया था कि वह बेहोश ही गई थीं।