फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब संजो रहा हरियाणा की विरासत, जींद का इतिहास होगा संरक्षित

Sun, 09 Jul 2017 10:11 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
पंजाब सरकार ने हरियाणा की जींद रियासत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने का बीड़ा उठाया है। 250 साल पुरानी इस रियासत के करीब 850 दुर्लभ छायाचित्रों का पंजाब के पर्यटन विभाग ने डिजिटलाइजेशन करवा कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजा है।
विज्ञापन

2 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
हालांकि जींद रियासत से जुड़ी कोई बड़ी निशानी अब नहीं बची है। यहां का किला भी अब जमींदोज हो चुका है। जींद रियासत पर 1763 में फुलकियां सिखों का राज कायम हुआ था। नाभा के साथ जंग के बाद संगरूर भी इस रियासत का हिस्सा बन गया तो 1827 में राज्य का हेडक्वार्टर जींद से संगरूर शिफ्ट कर दिया गया। उसकेबाद से सियासत की गतिविधियों से लेकर विकास का केंद्र संगरूर ही रहा। संगरूर का उस समय सामरिक और व्यापारिक महत्व था। 
विज्ञापन

3 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
पंजाब सरकार द्वारा संरक्षित की गई ये ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफ वर्ष 1905 केआसपास से शुरू होकर अगले कई वर्षों की हैं। इनमें रेजीमेंट का निरीक्षण करते राजा, मार्केट, लेडी मिंटो रणबीर गर्ल्स कॉलेज, वेटरीनरी अस्पताल, दीवाने-खास व दरबार हॉल, हाईस्कूल, गोल्डन जुबली अस्पताल, राजा की विशेष ट्रेन के संगरूर पहुंचने पर स्टेशन पर स्वागत केलिए खड़े लोग शुमार है, वहीं परेड से लेकर दिल्ली में किंग जॉर्ज की ताजपोशी की भी फोटोग्राफ है। 

4 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
उन्हें देख कर लगता है कि उस समय संगरूर काफी विकसित था। तस्वीरें उस समय के आर्थिक व सामाजिक हालात भी बयां करती हैं। ये तस्वीरें संगरूर की लाइब्रेरी में काफी समय से धूल खा रही थीं। पर्यटन विभाग ने इन्हें निकाल कर एक निजी कंपनी को संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी। इस काम में करीब तीन साल का समय लगा। 
विज्ञापन

5 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
उसकेबाद विभाग ने पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी से सभी फोटोग्राफ का डिजिटलाइजेश करवाया, ताकि ये हमेशा के लिए आने वाली पीढ़ियों केलिए उपलब्ध रहें। सारी फोटोग्राफ अब संगरूर लाइब्रेरी पहुंचा दी गई हैं। संगरूर में एक म्यूजियम निर्माणाधीन है, उसके बनते ही फोटोग्राफ वहां प्रदर्शित की जाएंगी।
विज्ञापन

6 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
जींद रियासत की फोटोग्राफ से एक और दिलचस्प खुलासा हुआ है। जिस तरह आज इंडिया ट्रेड फेयर या वर्ल्ड ट्रेड फेयर आयोजित किए जाते हैं। जिनमें बड़ी कंपनियां शिरकत करती हैं। उस जमाने में भी यह व्यवस्था थी। जींद रियासत की फोटोग्राफ में काफी तस्वीरें 1909 में लाहौर में आयोजित इंडस्ट्रियल एंड एग्रीकल्चर एग्जीबिशन ऑफ पंजाब नॉर्थ वेस्टर्न फ्रंट प्रॉवंस एंड कश्मीर की हैं। 
विज्ञापन

7 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
जिनसे पता चलता है कि बड़े पैमाने पर इसका आयोजन हुआ और इसमें देश भर की कंपनियों ने शिरकत की। उस जमाने में भी प्रदर्शनी स्थल का ले-आउट प्लान तैयार किया गया था, उसकी भी तस्वीरें हैं। प्रदर्शनी में मेयो स्कूल ऑफ आर्ट लाहौर, नारायण ब्रश फैक्ट्री आगरा, हैंड बैग्स ऑफ इंडिया, धारीवाल वुलेन मिल्स समेत देश की कई नामी कंपनियों केस्टॉल की तस्वीरें हैं। 

8 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
यह है जींद का इतिहास 
जींद, पटियाला और नाभा रियासत के राजा एक ही खानदान से रहे हैं। सरहिंद के मुगल सम्राट के खिलाफ विद्रोह के बाद चौधरी फूल के खानदान से गजपत सिंह ने 1768 में जींद रियासत को संभाला और वे पहले राजा बने। जींद रियासत की सीमाएं उस समय दादरी, जींद, सफीदों, करनाल और संगरूर तक फैली थीं। राजा गजपत सिंह की मौत 1789 में हुई। इसके बाद राजा भाग सिंह ने गद्दी संभाली और वे 1819 तक राजा रहे। 1819 में राजा फतेह सिंह ने राजकाज संभाल लिया। 1822 में उनकी मृत्यु के बाद संगत सिंह को राजा बनाया गया। राजा संगत सिंह के कोई औलाद नहीं थी।

9 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
लिहाजा 1834 में उनकी मृत्यु के बाद शाही परिवार में सत्ता संघर्ष शुरू हो गया, जो तीन साल तक चला। इस दौरान राजा फतेह सिंह की पत्नी ने राजकाज संभाला। इसके बाद 1837 में स्वरूप सिंह राजगद्दी पर बैठे। वे 1884 तक राजा रहे। 1884 से 1887 तक राजा रघुबीर सिंह को सत्ता मिली। उनके बेटे बलबीर सिंह की मृत्यु कम उम्र में हो जाने के कारण राजा रघुबीर सिंह से सत्ता सीधे उनके पौत्र राजा रणबीर सिंह को गई।
विज्ञापन

10 of 10
Punjab Save's Glorious history of Jind
यह दौर जींद रियासत के इतिहास में बहुत ही बुरा साबित हुआ। जींद रियासत के राजाओं ने खुले तौर पर अंग्रेजों का साथ दिया और विद्रोह के दौरान जींद रियासत की सेनाएं अंग्रेजों की तरफ से लड़ीं। इसके इनाम के तौर पर झज्जर रियासत को तोड़ कर उसका हिस्सा दादरी जींद रियासत को दिया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें