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पंजाब-हरियाणा के 15 खिलाड़ी, जिन्होंने एशियन गेम्स 2018 में देश को मेडल दिलाकर रचा इतिहास

Tue, 04 Sep 2018 09:40 AM IST
ब्यूरो डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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एशियन गेम्स 2018
जानिए, पंजाब और हरियाणा के उन 15 होनहार खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने जकार्ता में 18वें एशियन गेम्स 2018 में देश के लिए मेडल जीतकर इतिहास रचे, जानकर गर्व होगा आपको।
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हरियाणा की 8 बेटियों ने एशियन गेम्स में 20 साल बाद देश को दिलाया सिल्वर

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इंडियन वूमेन्स हॉकी टीम
हरियाणा की 8 बेटियों के सहारे ही एशियन गेम्स में 20 साल बाद भारत को सिल्वर मेडल मिला है। भारतीय हॉकी टीम में हरियाणा की आठ बेटियां खेल रही थी और इन बेटियों ने एशियाड में 14 गोल भी दागे, जिनमें फाइनल में इकलौता गोल भी सोनीपत की नेहा गोयल ने किया। इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1998 में बैंकाक में हुए एशियन गेम्स में देश को सिल्वर मेडल दिलाया था। वहीं फाइनल में जिस जापान से हॉकी टीम हारी है, उससे ओलंपिक में लगातार खराब प्रदर्शन के बावजूद भारतीय टीम ने 2-2 पर ड्रा खेला था। जिसके बाद भी टीम बेहतर खेलती रही, लेकिन जापान ने एक ओर गोल करके भारत से मैच छीन लिया। इसके बावजूद एशियन गेम्स में सिल्वर भी हरियाणा व देश के लिए बड़ी उपलब्धि है।
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पंजाब हरियाणा के खिलाड़ियों ने हॉकी में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराया

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इंडियन मेन्स हॉकी टीम
भारतीय हॉकी टीम ने शनिवार को 18वें एशियन गेम्स के पुरुष हॉकी मुकाबले में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराते हुए कांस्य पदक जीता। सेमीफाइनल में मलेशिया से मिली हार के बाद एक बार फिर भारत ने खुद को साबित किया है। हालांकि दोनों टीमों ने अंत तक कोशिशें की लेकिन भारत ने अपनी एक गोल की लीड को आखिर तक बचा कर रखा। आकाशदीप सिंह ने मैच के तीसरे मिनट में ही गोलकर भारत का खाता खोला। हरमनप्रीत सिंह ने मैच के 50वें मिनट में गोल कर भारतीय बढ़त को दोगुना कर दिया। पाकिस्तान के लिए इकलौता गोल मोहम्मद आतिक ने किया। दोनों टीमों के लिए सेमीफाइनल में हार लंबे समय तक याद रहेगी क्योंकि टूर्नामेंट को जीतने वाली टीम सीधे ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेगी।

बजरंग पूनिया

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बजरंग पूनिया
हरियाणा के के झज्जर जिले के इस पहलवान ने देश को एशियन गेम्स में पहला गोल्ड मेडल दिलाया। 65 किलो फ्रीस्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले बजरंग पूनिया ने अपनी जीत दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया। बजरंग पूनिया ने फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जापान के पहलवान तकातानी डियाची को 11-8 से हराया। इसके साथ ही वे एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के 9वें पहलवान हो गए। भारत ने एशियाई खेलों में अब तक कुल 10 गोल्ड मेडल जीते हैं। करतार सिंह भारत के ऐसे पहलवान हैं, जो दो एशियाई खेलों (1978 बैंकाक और 1986 सियोल) में गोल्ड मेडल जीते चुके हैं। हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर बजरंग को 3 करोड़ रुपए का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की।
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विनेश फोगाट

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विनेश फोगाट
डॉक्टर ने गेम छोड़ने को कह दिया था, बोला जान को खतरा है। पर विनेश मानी नहीं, खेलने का ऐसा जुनून था कि नई शुरूआत की और वर्ल्ड चैम्पियन बनकर ही सांस ली। हरियाणा के भिवानी के बलाली गांव की विनेश ने महिलाओं की फ्रीस्टाइल 50 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जापान की पहलवान यूकी आयरी को से हराया। विनेश ने शानदार वापसी करते हुए यह खिताब हासिल किया। इससे पहले विनेश ने 21वें कॉमनवेलथ गेम्स में 50 किलोग्राम की कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। 2016 ओलंपिक फ्री स्टाइल कुश्ती में 48 किलोग्राम भार वर्ग के मुकाबले में विनेश चीन की पहलवान सुनियान के साथ भिड़ते हुए चोटिल हो गई थी। खास बात ये कि विनेश ने एशियन गेम्स 2018 में अपने सफर की शुरुआत सुनियान को हराकर ही की। चोट से उबरने के बाद विनेश ने एक के बाद एक दो गोल्ड मेडल जीतकर खुद को साबित किया।
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नीरज चोपड़ा

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नीरज चोपड़ा
एशियन गेम्स 2018 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचते हुए नीरज चोपड़ा ने तीन नेशनल रिकॉर्ड बनाए। हरियाणा के पानीपत में जन्मे 20 साल नीरज चोपड़ा ने जकार्ता में जिंदगी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए तीन नए कीर्तिमान स्थापित किए। पहला, नीरज ने 88.06 मीटर दूर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड बनाया। नीरज ने अपना ही 87.43 का रिकॉर्ड तोड़ा, जो उन्होंने दोहा में मई में डायमंड लीग के पहले चरण में बनाया था। दूसरा, इसके साथ ही नीरज ने नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया। तीसरा, नीरज चोपड़ा एशियाड में भाला फेंक प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। देश को 67 साल बाद पहला जेवलिन चैंपियन मिला है। हालांकि इससे पहले भी इस स्पर्धा में देश को दो मेडल मिल चुके हैं, एक 1982 दिल्ली में गुरतेज ने कांस्य और 1951 में दिल्ली में परसा सिंह ने रजत जीता था। विदेशी धरती पर नीरज इस स्पर्धा का पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं। नीरज चोपड़ा के नाम पर जूनियर विश्व रिकार्ड (86.48 मीटर) भी है, और अब दोनों ही रिकॉर्ड ऐसे हैं जिन्हें भेद पाना हर किसी के बस में नहीं।
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अमित पंघाल

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अमित पंघाल
22 साल की उम्र में भारतीय सेना के जांबाज बॉक्सर अमित पंघाल ने एशियन गेम्स 2018 में ऐसा इतिहास रच दिया कि पूरा भारत देखता रही रह गया। भारतीय मुक्केबाज अमित पंघाल ने 18वें एशियन गेम्स में भारत को 14वां गोल्ड मेडल दिलाया। 49 किलोग्राम भारवर्ग के मुक्केबाजी फाइनल प्रतियोगिता में अमित का सामना रियो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट उजबेकिस्तान के हसनबॉय दुश्मातोव के साथ हुआ। बॉक्सर अमित पंघाल हरियाणा के रोहतक जिले में मायना गांव के रहने वाले हैं। अमित पंघाल मार्च 2018 से भारतीय सेना में जेसीओ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने इसी साल हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर नाम रोशन किया था। वहीं अब गोल्ड मेडल जीतकर मां-बाप का और देश का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया।

मंजीत सिंह

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मंजीत सिंह
पिता किसान और 20 साल का बेटा इतनी जुनूनी कि 12वीं के बाद पढ़ाई ही छोड़ दी। बोला देश के लिए कुछ करना है और कर भी दिखाया गोल्ड मेडल जीतकर। हरियाणा के हिसार जिले के 20 वर्षीय मनजीत सिंह चहल ने एशियन गेम्स 2018 में की 800 मीटर की दौड़ में देश को 9वां गोल्ड मेडल दिलाया। भारतीय दौड़ाक मनजीत सिंह ने 1.46.15 सैकेंड में दौड़ पूरी कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मनजीत चहल नरवाना उपमंडल के उझाना गांव के साधारण किसान परिवार से आता है। मनजीत ने 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद औपचारिक पढ़ाई छोड़ दी और पिछले चार-पांच साल से पूर्ण रूप से खेल पर ही ध्यान दे रहा है। इस गोल्ड के साथ मनजीत ने 56 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। बता दें कि 1962 के बाद पहली बार हुआ है कि भारत ने एथलेटिक्स की इस स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों अपने नाम किए।

संजीव राजपूत

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संजीव राजपूत
पिता पूड़ी का ठेला लगाते थे, लेकिन बेटे को एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया। बेटे ने भी पिता के सपने को उड़ान दी और एशियन गेम्स में वो इतिहास रच दिया, देखती रह गई दुनिया। हरियाणा के यमुनानगर निवासी शूटर संजीव राजपूत की। 37 वर्षीय संजीव ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में सिल्वर मेडल जीता है। संजीव के पिता कभी खाने का ठेला लगाते थे। मौजूदा वक्त में संजीव इंडियन नेवी में बतौर मास्टर चीफ पेटी ऑफिसर-2 और एक बेटी के पिता हैं। संजीव की इस उपलब्धि पर इंडियन नेवी को भी नाज है। संजीव राजपूत अब से पहले एशियन गेम्स में एक रजत और दो कांस्य पदक जीत चुके हैं।

 

विकास कृष्ण यादव

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मुक्केबाज विकास कृष्ण
एक घटना के बाद विकास कृष्ण छोड़ चुके थे बॉक्सिंग, लेकिन जुनून कम नहीं हुआ। वापसी की, लेकिन अब एशियन गेम्स में चोट लग गई है, पर एक अनोखा रिकॉर्ड जरूर बनाया है। हरियाणा के हिसार जिले के 26 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव की, जिन्होंने जकार्ता में एशियन गेम्स 2018 में 75 किलोग्राम वेट की कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। वे गोल्ड मेडल जीत सकते थे, लेकिन क्वार्टर फाइनल में विकास को बाई पलक पर चोट लगने के कारण सेमीफाइनल खेलने से अयोग्य करार दिया गया है। 31 अगस्त को मुकाबला होना था, लेकिन चोट के चलते वे बाहर हो गए और ब्रॉन्ज से ही संतोष करना पड़ा। विकास भले ही सेमीफाइनल में नहीं उतरे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने नाम एक रिकॉर्ड दर्ज कर दिया है। वह लगातार 3 एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बन गए हैं।

हिना सिद्धू

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हिना सिद्धू
हिना सिद्धू मूल रूप से पंजाब के लुधियाना की रहने वाली हैं। उन्होंने इंडोनेशिया के जकार्ता में चल रहे 18 वें एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। स्टार महिला शूटर हिना सिद्धू ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। इसी गेम्स में हिना ने सिल्वर मेडल भी जीता था। हिना सिद्धू वही लड़की है, जिसने 2016 में इरान की राजधानी तेहरान में हुई चैम्पियनशिप से नाम वापिस ले लिया था, क्योंकि इसमें हिजाब पहनने की अनिवार्यता थी। हिना ने हिजाब पहनने से इंकार करते हुए टूर्नामेंट से अपना नाम वापिस ले लिया था। हिना सिद्धू ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी थी। वे क्रांतिकारी नहीं हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि किसी खिलाड़ी के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य करना खेल भावना के लिए ठीक नहीं है।

तेजिंदर पाल सिंह तूर

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तेजिंदर पाल सिंह तूर
मोगा (पंजाब) के 23 वर्षीय एथलीट तेजिंदर पाल सिंह तेर ने 18वें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। तेजिंदर पाल सिंह ने पांचवें प्रयास में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर एशियाई खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया और देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। तेजिंदर पाल सिंह उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब 2017 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्हें रजत पदक मिला था। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले तेजिंदर पाल सिंह तूर बचपन में एक क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता के कहने पर उन्होंने शॉटपुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ। युवा तजिंदर को इसमें काफी सफलता मिली। हालांकि इस खेल में आने से पहले उन्हें कड़ी चुनौतियां का सामना भी करना पड़ा।

 

अरपिंदर सिंह

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अरपिंदर सिंह
18वें एशियाई खेलों के 21वें दिन पंजाब के अमृतसर जिला निवासी अरपिन्दर सिंह ने मेंस ट्रिपल जंप ईवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है। इसी ईवेंट में भारत के ही राकेश बाबू छठे स्थान पर रहे। अरपिंदर सिंह ने 16.77 मीटर का जंप लगाकर भारत की झोली में गोल्ड मेडल डाला। दूसरे अटेंप में अरपिंदर ने 16.58 मीटर कवर किया था। 6 में से 3 उनका लीगल जंप रहा। उन्होंने उजबेकिस्तान के रसलन को पीछे छोड़कर गोल्ड मेडल जीता।बता दें कि 48 साल के बाद भारत को इस ईवेंट में गोल्ड मेडल की प्राप्ति हुई है।

स्वर्ण सिंह और भगवान सिंह

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स्वर्ण सिंह-भगवान सिंह
105 डिग्री बुखार से तप रहा था स्वर्ण सिंह, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस होनहार के चैम्पियन बनने की कहानी भी काफी फिल्मी है। 18वें एशियन गेम्स 2018 में भारतीय रोवर्स की टीम में पंजाब के तीन युवाओं ने शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए दो मेडल जीते। इनमें स्वर्ण सिंह और सुखमन ने गोल्ड मेडल जबकि भगवान सिंह ने ब्रांज मेडल जीतकर देश के साथ पंजाब का नाम भी रोशन कर दिया। स्वर्ण सिंह और सुखमन पंजाब के मानसा जिले के रहने वाले हैं, जबकि भगवान सिंह मोगा (पंजाब) के निवासी हैं और फिलहाल रोपड़ में रह रहे हैं। इन तीनों खिलाड़ियों का चंडीगढ़ से भी अटूट रिश्ता है। मौजूदा समय में तीनों सेना के रोवर्स हैं और पुणे में तैनात हैं। स्वर्ण सिंह सेना में सूबेदार हैं जबकि भगवान सिंह और सुखमन सिपाही की पोस्ट पर हैं।

सीमा पूनिया

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सीमा पूनिया
बहादुर बेटी के जज्बे को सलाम, 11 साल की उम्र से खेल रही है। हर रोज 15 अंडे खाती हैं और जुनून ऐसा कि एशियन गेम्स 2018 में वो रिकॉर्ड कायम कर दिया, जो आज तक कोई न कर पाया। सीमा पूनिया ने 62.26 मीटर डिस्कस थ्रो कर कांस्य पदक पर कब्जा किया। यह उनका सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। सीमा ने पिछले एशियाड में इससे कम दूरी पर गोल्ड जीता था। बेशक सीमा पूनिया को डिस्कस थ्रो में भले ही कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन वह लगातार चार राष्ट्रमंडल खेलों, दो एशियाड और तीन ओलंपिक में खेलने वाली देश की पहली खिलाड़ी बन गईं। सीमा ने राष्ट्रमंडल खेलों में चार और एशियाड में दो पदक जीते हैं। हालांकि ओलंपिक में वह तमगा नहीं जीत पाई हैं। सीमा देश के लिए खेलने के साथ ही पुलिस की नौकरी और परिवार की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।
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अभिषेक वर्मा

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अभिषेक वर्मा
वकील से निशानेबाज बने हरियाणा के अभिषेक वर्मा भी शामिल थे जिन्होंने 219.3 का स्कोर बनाकर कांस्य पदक जीता। कड़ी मेहनत, लगन के दम पर अभिषेक वर्मा ने 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी में भारत की झोली में कांस्य पदक डालकर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर दिया। अभिषेक के पिता अशोक कुमार वर्मा पलवल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। वे बेटे की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। अभिषेक वर्मा के पिता अशोक वर्मा बताते हैं कि 2015 से पहले उसके बेटे को शूटिंग का कुछ नहीं पता था। 2015 में उनकी पोस्टिंग हिसार में हुई। इसी दौरान अभिषेक जिम करने के लिए जाता था। उसे पता चला कि जिम के नजदीक ही एक शूटिंग रेंज है। अभिषेक उस शूटिंग रेंज में पहुंच गया और पहली बार राइफल उठाई। इत्तफाक से शूटिंग के लिए पहुंचे अभिषेक ने इस खेल को अपनी करियर बना लिया।

 
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